International News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने आज संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan) के साथ टेलीफोन पर बातचीत की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र मध्य पूर्व (Middle East) में जारी तनाव, विशेष रूप से ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष (Iran-Israel Conflict) रहा। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाली के उपायों पर गहरी चिंता व्यक्त की।
क्षेत्रीय सुरक्षा और शांति पर जोर
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति के साथ वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा की। ईरान और इजरायल के बीच मिसाइल हमलों के कारण लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है। भारत और यूएई दोनों के आर्थिक हित इस क्षेत्र की शांति से जुड़े हुए हैं।
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच मध्यस्थता की कोशिश?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस संघर्ष में एक संतुलित भूमिका निभा रहा है। पीएम मोदी की यूएई राष्ट्रपति से यह बातचीत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यूएई मध्य पूर्व की राजनीति में एक प्रभावशाली खिलाड़ी है और भारत के साथ उसके संबंध बहुत मजबूत हैं। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि कूटनीति और संवाद ही इस संकट का एकमात्र समाधान है।
भारतीय समुदाय और द्विपक्षीय संबंध
बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने यूएई में रहने वाले लाखों भारतीयों के कल्याण के लिए राष्ट्रपति अल नाहयान का आभार व्यक्त किया। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। हाल ही में हुए द्विपक्षीय समझौतों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
वैश्विक चिंताएं और भारत का रुख
भारत ने हमेशा से ‘हिंसा त्यागने’ और ‘टेबल पर बैठकर बात करने’ की वकालत की है। जी20 की अध्यक्षता के बाद से भारत वैश्विक शांति के लिए एक विश्वसनीय आवाज बनकर उभरा है। पीएम मोदी की यह कॉल दुनिया को यह संदेश देती है कि भारत शांति के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है।
निष्कर्ष (Conclusion)
पीएम मोदी और यूएई राष्ट्रपति की यह टेलीफोनिक वार्ता ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया की निगाहें मध्य पूर्व पर टिकी हैं। क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए भारत और यूएई का साथ मिलकर काम करना न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए सुखद संकेत है।
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