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भारत ने Census 2027 की अधिसूचना जारी की: आजादी के बाद पहली बार सभी जातियों की गिनती

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गृह मंत्रालय ने जारी की आधिकारिक अधिसूचना; पहली डिजिटल जनगणना में सभी समुदायों का जातिगत डेटा शामिल होगा

By Press of Asia Desk | 17 जून 2025 | नई दिल्ली, भारत

भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक नीति फैसले के तहत Census 2027 की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। गृह मंत्रालय ने 16 जून 2025 को इस संबंध में notification जारी किया। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास होगी, क्योंकि आजादी के बाद पहली बार राष्ट्रीय जनगणना में सभी समुदायों की जातिगत गिनती यानी caste enumeration को शामिल किया जाएगा।

इसके साथ ही Census 2027 भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना भी होगी, जिसमें mobile application और online self-enumeration portal के जरिए डेटा संग्रह किया जाएगा।

मुख्य बातें

  • गृह मंत्रालय ने 16 जून 2025 को Census 2027 की अधिसूचना जारी की।
  • आजादी के बाद पहली बार सभी समुदायों की जातिगत गिनती होगी।
  • अब तक जनगणना में केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का डेटा अलग से दर्ज किया जाता था।
  • Census 2027 भारत की पहली fully digital census exercise होगी।
  • डेटा संग्रह के लिए mobile apps का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • नागरिकों को online self-enumeration यानी खुद से जानकारी भरने का विकल्प मिलेगा।
  • 35 लाख से अधिक field functionaries को digital census के लिए training दी जाएगी।
  • जनगणना दो चरणों में होगी।
  • पहला चरण अक्टूबर 2026 में Ladakh और snow-bound areas में होगा।
  • दूसरा चरण मार्च 2027 में देश के बाकी हिस्सों में होगा।
  • अप्रैल 2025 में Cabinet Committee on Political Affairs ने caste enumeration को मंजूरी दी थी।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

भारत में जनगणना हर 10 साल में होती है। आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। इसके बाद अगली जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन COVID-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया। अब Census 2027 भारत के demographic data को 16 साल से अधिक समय बाद अपडेट करेगा।

जातिगत जनगणना की मांग लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और पिछड़े वर्गों से जुड़ी संस्थाओं द्वारा की जा रही थी। भारत में आखिरी व्यापक जातिगत जनगणना 1931 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी।

2011 में Socio-Economic and Caste Census यानी SECC कराया गया था, लेकिन उसका पूरा caste data official रूप से जारी नहीं किया गया और न ही उसे व्यापक नीति निर्माण के लिए पूरी तरह इस्तेमाल किया गया।

अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली Cabinet Committee on Political Affairs ने आगामी जनगणना में caste enumeration को शामिल करने की मंजूरी दी। इसे एक बड़ा राजनीतिक और नीतिगत बदलाव माना जा रहा है।

बिहार सहित कुछ राज्यों में caste survey के बाद राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत जनगणना की मांग और तेज हो गई थी।

Census 2027 में क्या गिना जाएगा?

Census 2027 में सभी व्यक्तियों की जातिगत पहचान से जुड़ा डेटा इकट्ठा किया जाएगा। यह मौजूदा व्यवस्था से बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि अब तक राष्ट्रीय जनगणना में मुख्य रूप से Scheduled Castes और Scheduled Tribes का data अलग से दर्ज होता था।

इस बार सभी समुदायों का caste data लिया जाएगा। इससे Other Backward Classes यानी OBCs और अन्य समुदायों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।

सरकारी sources के अनुसार, यह डेटा welfare schemes, reservation policies, social justice programmes और evidence-based policy making में उपयोगी हो सकता है।

भारत की पहली डिजिटल जनगणना

Census 2027 भारत की पहली पूरी तरह digital census exercise होगी। इसके लिए mobile applications का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही एक Census Monitoring and Management Portal भी तैयार किया जाएगा, जिसमें multilingual support होगा।

इस बार नागरिकों को online self-enumeration का विकल्प भी मिलेगा। इसका मतलब है कि लोग अपनी जानकारी online portal के माध्यम से खुद भी भर सकेंगे।

35 लाख से अधिक field functionaries को digital tools के इस्तेमाल के लिए training दी जाएगी। डेटा की accuracy बढ़ाने और errors कम करने के लिए built-in validation systems का इस्तेमाल किया जाएगा।

जनगणना दो चरणों में होगी

Census 2027 को दो phases में पूरा किया जाएगा।

Phase 1

Reference Date: 1 अक्टूबर 2026
यह चरण Union Territory of Ladakh और Jammu & Kashmir, Himachal Pradesh और Uttarakhand के snow-bound areas में होगा।

Phase 2

Reference Date: 1 मार्च 2027
यह चरण भारत के बाकी हिस्सों में किया जाएगा।

इस तरह पूरे देश का updated demographic और caste-based data तैयार किया जाएगा।

राजनीतिक महत्व

Census 2027 में caste enumeration को शामिल करना हाल के वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण policy decisions में से एक माना जा रहा है।

यह फैसला reservation policy, political representation और welfare planning पर बड़ा असर डाल सकता है। 2029 के आम चुनावों से पहले आने वाला यह caste data राजनीतिक दलों की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

Census 2027 के बाद delimitation यानी निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे Lok Sabha और State Assemblies की seats के allocation और representation पर असर पड़ सकता है।

जातिगत डेटा आने के बाद विभिन्न समुदाय अपनी population share के आधार पर representation और reservation को लेकर नई मांग उठा सकते हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में जनगणना केवल population count नहीं होती। यह governance का आधार है।

सरकारी योजनाएं, budget allocation, infrastructure planning, health services, education policy, welfare schemes और political representation — ये सभी census data पर आधारित होते हैं।

अगर caste data भी उपलब्ध होगा, तो सरकार अलग-अलग समुदायों की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकेगी।

Social researchers और policy experts लंबे समय से कहते रहे हैं कि updated caste data न होने से affirmative action policies की effectiveness को मापना मुश्किल होता है। Census 2027 इस gap को भरने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।

संभावित प्रभाव

Caste enumeration से सरकार को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किस समुदाय की आबादी कितनी है और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति क्या है।

इससे welfare schemes को ज्यादा targeted बनाया जा सकता है।

लेकिन दूसरी तरफ, caste data आने के बाद reservation cap, OBC representation और political participation को लेकर बहस और तेज हो सकती है।

कई राजनीतिक दल इस डेटा का इस्तेमाल social justice के मुद्दे को मजबूत करने के लिए कर सकते हैं, जबकि कुछ लोग यह चिंता भी जता सकते हैं कि इससे caste-based politics और बढ़ सकती है।

आगे क्या होगा?

Census 2027 के लिए field operations की तैयारी शुरू होगी। 35 लाख से अधिक enumerators और field functionaries को training दी जाएगी।

Online self-enumeration portal को census dates से पहले शुरू किया जाएगा।

Political parties, OBC groups और social organisations caste enumeration methodology पर करीबी नजर रखेंगे।

Census 2027 के results आने के बाद reservation structure और welfare schemes को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है।

Census के बाद delimitation process भी भारत की राजनीति का बड़ा विषय बन सकता है।

निष्कर्ष

Census 2027 भारत के लिए एक ऐतिहासिक exercise होने जा रही है। यह सिर्फ जनसंख्या की गिनती नहीं होगी, बल्कि सामाजिक संरचना को समझने का एक बड़ा प्रयास भी होगा।

आजादी के बाद पहली बार सभी जातियों की व्यापक गिनती देश की politics, policy making और social justice debate को नई दिशा दे सकती है।

हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि इस data का इस्तेमाल जिम्मेदारी, पारदर्शिता और सामाजिक सद्भाव के साथ किया जाए।

Caste enumeration भारत को बेहतर policy planning का मौका दे सकता है, लेकिन इसके साथ राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता भी जुड़ी हुई है।

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