मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- रिपोर्टों के अनुसार, भारत में 2025 में युवा बेरोजगारी दर 16 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है, जो पिछले वर्षों की तुलना में चिंताजनक स्तर पर है।
- सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के अनुसार, शहरी युवाओं में बेरोजगारी ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक दर्ज की जा रही है।
- केंद्र सरकार ने स्किल इंडिया, पीएम इंटर्नशिप स्कीम और अग्निवीर योजना जैसी पहलों के माध्यम से रोजगार बढ़ाने की कोशिश की है।
- उद्योग जगत और विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षा और रोजगार बाजार के बीच की खाई को पाटना सबसे बड़ी चुनौती है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के बढ़ते उपयोग से पारंपरिक नौकरियों पर संकट गहराने की आशंका भी जताई जा रही है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ (Background and Context)
भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक है। अनुमानों के मुताबिक, देश की कार्यशील आयु (15-64 वर्ष) की जनसंख्या 2025 तक लगभग 90 करोड़ को पार कर सकती है। यह जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) एक ओर जहाँ बड़ा अवसर है, वहीं दूसरी ओर इतने बड़े युवा वर्ग को रोजगार देना सरकार और उद्योग जगत दोनों के लिए एक विशाल चुनौती बनी हुई है।
पिछले एक दशक में भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी, सेवा क्षेत्र और विनिर्माण में उल्लेखनीय प्रगति की है। परंतु रिपोर्ट्स के अनुसार, रोजगार सृजन की गति उतनी तेज़ नहीं रही जितनी कार्यबल में प्रवेश करने वाले युवाओं की संख्या। वर्ष 2020 के बाद कोविड-19 महामारी ने लाखों असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को प्रभावित किया और रोजगार संकट को और गहरा कर दिया।
शिक्षा व्यवस्था और उद्योग की मांग के बीच की खाई भी एक बड़ी समस्या है। कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रमों के बड़े प्रतिशत स्नातक उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार नहीं होते, जिस कारण वे नौकरी पाने में असमर्थ रहते हैं।
यह क्यों मायने रखता है (Why It Matters)
बेरोजगारी केवल एक आर्थिक समस्या नहीं है — यह सामाजिक असंतोष, मानसिक स्वास्थ्य संकट और राजनीतिक अस्थिरता का भी कारण बन सकती है। जब युवा वर्ग रोजगार से वंचित रहता है, तो इससे उनकी क्रय शक्ति घटती है, जो घरेलू मांग और आर्थिक वृद्धि को प्रभावित करती है।
विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि यदि तकनीकी बदलाव — विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स — के अनुरूप भारत के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण नहीं दिया गया, तो आगामी दशक में बेरोजगारी और भी गंभीर रूप ले सकती है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, ऑटोमेशन से 2030 तक करोड़ों पारंपरिक नौकरियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
सरकार की ओर से उठाए गए कदमों जैसे पीएम इंटर्नशिप स्कीम, नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (NAPS) और स्किल इंडिया मिशन की दिशा सकारात्मक बताई जा रही है, परंतु इनके ज़मीनी प्रभाव को लेकर विश्लेषकों की राय मिश्रित है।
आगे क्या होगा (What Happens Next)
केंद्र सरकार ने 2025-26 के बजट में रोजगार सृजन और युवा कौशल विकास के लिए अतिरिक्त आवंटन का प्रस्ताव किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में इंटर्नशिप के अवसर बढ़ाने की योजना बना रही है, जिससे लाखों युवाओं को प्रत्यक्ष कार्यानुभव मिल सके।
इसके साथ ही, नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत व्यावसायिक शिक्षा को स्कूल और कॉलेज स्तर पर मुख्यधारा में लाने की कोशिश हो रही है। यदि इन सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में युवा रोजगार की स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
हालाँकि, आर्थिक विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि केवल सरकारी प्रयासों से समस्या हल नहीं होगी — उद्योग जगत को भी स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और नए उद्यमों को प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभानी होगी।
स्रोत संदर्भ (Source References)
- सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) – www.cmie.com
- श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार – labour.gov.in
- Reuters – India Youth Unemployment Reports 2025
- BBC Hindi – भारत में रोजगार संकट पर रिपोर्ट
- नीति आयोग – रोजगार और कौशल विकास रिपोर्ट
