भारतीय वेतमंपालेट़ं मीराबाई चानू ने 26 जुलाई 2026 को ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेल्स 2026 में इतिहास रचते हुे महिलाओं की 48 किलोग्राम वर्ग के वेतमंपालन स्पर्धा में सोने का तमगा जीतकर भारत को पहला स्वर्न दिलाया। 31 वर्षीय इस स्टार आथलीट ने स्नेच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम का वजन उठाते हुए कुल 190 किलोग्राम का रिकॉर्ड तोड़ने वाला लिग्स लगाकर सोना पदक पर कब्जा किया।
यह जीत मीराबाई की लगातार तीसरी कॉमनवेल्थ गेल्स सोने की जीत थी, बौर उनकी पहले 2018 गोल्ड कोस्ट और 2022 बर्मिंघम में भी सोने के पदक जीते थे। इससे उनके समग्र कॉमनवेल्थ गेल्स करियर का यह चौथा पदक है। इससे पहले, 2014 ग्लासगो संस्करण में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था और टोक्यो 2020 ओलंपिक्स में रजत पदक प्राप्त किया था।
मीराबाई चानू की इस एतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह भारतीय वेतमंपालन का एक और गरिमामय अध्याय है और मीराबाई हर भारतीय के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाक्रिष्णन ने भी उनके समर्पण, संघर्ष और निरंतर उत्कृष्तता की सराहना की। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेल्स 2026 में यह भारत का पहला स्वर्न पदक था, जिसके बाद से देश की पदक तालिका लगातार बढ़ती रही है और मलेशिया के अस्नील बिन बीदिन को गेम्स रिकॉर्ड 299 किलोग्राम के साथ निजी वर्ग में सोना पदक मिला।
मीराबाई चानू की यह जीत सिर्फ आथलेटिक सफलता नहीं, बल्कि संघर्षों और जॊट से निकलने की प्रेरक कहानी है। उन्होंने कहा, “मेंने काई कुर्बानियां दी और चोटों से भरी करीअ से लड़कर इस मुकाम तक पहुंची हूं, लेकिन मुझे र्वौरव्व है कि मेंने भारत के लिए यह तीसरा सोना जीता।” उनकी यह सफलता देश भर की महिला खिलाड़ियों और युवा आथलीटों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
