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राहुल गांधी को आकाशवाणी भवन से हटाया गया: घंटों का धरना, रात में हिरासत और रिहाई; पुलिस, चुनाव आयोग और भाजपा ने क्या कहा

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11 मिनट में पढ़ें

7 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मिलने की मांग पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा मंगलवार को नई दिल्ली के आकाशवाणी भवन परिसर में घंटों धरने पर बैठे रहे। रात करीब 8 बजे दिल्ली पुलिस ने उन्हें और दूसरे नेताओं को वहां से हटाया और न्यू पुलिस लाइंस, किंग्सवे कैंप ले गई। डायनामाइट न्यूज़ के अनुसार दोनों को रात 10:20 बजे छोड़ दिया गया। पुलिस का कहना है कि मार्च की अनुमति नहीं ली गई थी। चुनाव आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी दल ने मिलने का समय ही नहीं मांगा था।

मुख्य बातें

  • धरना आकाशवाणी भवन के रिसेप्शन गेट के पास एक पेड़ के नीचे हुआ। आज तक के अनुसार यह करीब 8 घंटे चला; दैनिक जागरण की अंग्रेज़ी वेबसाइट ने करीब 9 घंटे लिखा है।
  • रिपोर्टों में “हिरासत” शब्द है। जिन रिपोर्टों को हमने पढ़ा, उनमें किसी नेता की औपचारिक गिरफ्तारी या मामला दर्ज होने की बात नहीं है।
  • हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या पर रिपोर्टें अलग हैं: करीब 250 से 260।
  • चुनाव आयोग के मुताबिक उसने ज्ञापन लेने के लिए अपना सबसे वरिष्ठ अधिकारी भेजने की पेशकश की थी, जिसे सांसदों ने नहीं माना।
  • भाजपा ने इसे “ड्रामा” कहा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नेता प्रतिपक्ष को जबरन हटाने पर सवाल उठाया।
  • एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने CEC को निलंबित करने की अंतरिम मांग नहीं मानी थी, पर याचिकाओं पर नोटिस जारी किया था।

दिन भर में क्या हुआ: समय के साथ

नीचे का क्रम आज तक, ETV भारत के लाइव ब्लॉग, द वीक, ANI और डायनामाइट न्यूज़ की रिपोर्टों से बनाया गया है। जहां दो रिपोर्टों में समय अलग है, वहां दोनों दिए गए हैं।

समयक्या हुआस्रोत
सुबह 11 बजेविपक्षी सांसदों का मार्च संसद से निर्वाचन सदन की ओर निकला।आज तक
इसके कुछ देर बादपुलिस ने संसद मार्ग पर नीति आयोग के दफ्तर के पास बैरिकेड लगाकर मार्च रोक दिया। राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी तिरंगा लेकर बैरिकेड पर चढ़ गए। प्रियंका गांधी वाड्रा को पुलिस बस में बैठाया गया।द वीक, ETV भारत
दोपहर 12:20 से 1 बजे के बीचराहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और दीपेंद्र हुड्डा आकाशवाणी भवन के रिसेप्शन गेट के पास पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए। आज तक ने समय 12:20 बजे बताया है, ETV भारत ने करीब 1 बजे।आज तक, ETV भारत
3:25 बजेराहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पुलिस मीडियाकर्मियों को वहां से हटा रही है।ETV भारत
करीब 4 बजेदिल्ली पुलिस ने चुनाव आयोग को बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में करीब 240 सांसद आयोग से मिलना चाहते हैं।चुनाव आयोग का बयान (ANI, द स्टेट्समैन)
4:24 बजेराहुल गांधी ने पूछा कि उन्हें बताया जाए कि वे कहां बैठ सकते हैं: इंडिया गेट पर या जंतर मंतर पर।ETV भारत
5:41 बजेराहुल गांधी ने कहा कि CEC से मुलाकात होने तक वे वहीं बैठे रहेंगे।ETV भारत
रात 8 से 8:46 बजे के बीचपुलिस ने धरना हटाया। आज तक के अनुसार पहले दीपेंद्र हुड्डा, पवन खेड़ा और चरणजीत सिंह चन्नी को, फिर महुआ मोइत्रा और डेरेक ओ’ब्रायन को, और अंत में प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी को ले जाया गया।आज तक, ETV भारत
इसके बादनेताओं को न्यू पुलिस लाइंस, किंग्सवे कैंप पहुंचाया गया।ANI, ETV भारत
रात 9:09 बजेचुनाव आयोग ने अपना बयान जारी किया।ETV भारत
रात 10:20 बजेराहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को छोड़ दिया गया। दैनिक जागरण के अनुसार हिरासत करीब दो घंटे रही।डायनामाइट न्यूज़, दैनिक जागरण

कितने लोग हिरासत में लिए गए

इस पर रिपोर्टें अलग हैं। दैनिक जागरण ने करीब 260 लोगों की बात कही है, जिनमें 10 सांसद बताए गए हैं। डायनामाइट न्यूज़ ने करीब 250 लोग और उनमें लगभग 50 सांसद लिखे हैं। सांसदों की कुल संख्या भी अलग-अलग बताई गई: चुनाव आयोग के बयान में करीब 240, जबकि राहुल गांधी ने करीब 300 कहा। जिन नेताओं के नाम रिपोर्टों में आए हैं उनमें के.सी. वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, के. सुरेश, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और इमरान प्रतापगढ़ी शामिल हैं। दैनिक जागरण ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ’ब्रायन के नाम भी दिए हैं।

राहुल गांधी और विपक्ष ने क्या कहा

आज तक के अनुसार राहुल गांधी ने धरने के दौरान कहा, “मुझे परवाह नहीं कि बीजेपी क्या कहती है. मैं यहां लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़ा हूं.” समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट, जिसे पंजाब केसरी ने छापा, में उनका यह बयान है: “चुनाव आयोग यहां से 50 गज की दूरी पर है। वे हमें वहां जाने नहीं दे रहे हैं।” ANI के मुताबिक उन्होंने कहा कि वे सिर्फ ज्ञानेश कुमार और बाकी दो चुनाव आयुक्तों से मिलकर सवाल पूछना चाहते हैं, क्योंकि करोड़ों लोगों ने विपक्ष को वोट दिया है।

रिहाई के बाद राहुल गांधी ने X पर लिखा, “लोकतंत्र के गद्दारो को बचाने के लिए बचे-खुचे लोकतंत्र को घसीटा गया है। हिसाब होगा – एक भी देशद्रोही बख्शा नहीं जाएगा।” यह पोस्ट News24 ने छापी है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने X पर लिखा कि राहुल गांधी शांति से धरने पर बैठे थे और आयोग से मुलाकात मांग रहे थे, और नेता प्रतिपक्ष को जबरन हिरासत में लेना संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, भाजपा के इशारे पर नहीं। ये दोनों बयान ANI ने दिए हैं।

पुलिस का पक्ष

ANI के अनुसार दिल्ली पुलिस ने कहा कि मार्च की अनुमति के लिए नई दिल्ली ज़िले के पुलिस उपायुक्त के पास कोई औपचारिक आवेदन नहीं आया था और कोई अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस के मुताबिक यह जमावड़ा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन था, और कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा हालात बिगड़ने से रोकने के लिए हिरासत ज़रूरी थी। दैनिक जागरण के अनुसार पुलिस ने यह भी कहा कि नेता परिसर में बिना अनुमति घुसे थे।

चुनाव आयोग का पक्ष

आयोग ने रात में जारी बयान में कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने अपने प्रतिनिधियों के ज़रिए मुलाकात का समय नहीं मांगा था। द स्टेट्समैन और India.com के अनुसार आयोग को करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस से पता चला कि लगभग 240 सांसद संसद भवन एनेक्सी में आयोग से मिलना चाहते हैं। आयोग ने इस मांग को असामान्य बताया, क्योंकि तय प्रक्रिया में ऐसी बैठकें आयोग के दफ्तर में होती हैं।

बयान के मुताबिक आयोग ने फिर भी ज्ञापन लेने के लिए ड्यूटी पर मौजूद अपने सबसे वरिष्ठ अधिकारी को भेजने की पेशकश की, जिसे उसने अभूतपूर्व कदम कहा, लेकिन सांसदों ने यह पेशकश नहीं मानी। आयोग ने यह भी कहा कि कोई भी दल कभी भी मुलाकात का अनुरोध कर सकता है और आयोग समय देखकर तारीख तय करता है। जिन रिपोर्टों को हमने पढ़ा, उनमें इस बयान पर कांग्रेस का औपचारिक जवाब नहीं है।

भाजपा की प्रतिक्रिया

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर बार-बार हमला करने से न लोकतंत्र को फायदा होगा, न कांग्रेस को जनता का समर्थन वापस मिलेगा, और उन्होंने इसे रोज़ का ड्रामा बताया, ANI ने लिखा। ETV भारत के अनुसार भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया, और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस को फर्जी वोटों से लगाव है।

बुधवार को भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आयोग के प्रेस बयान से साफ हो गया है कि राहुल गांधी का दिन भर का दावा गलत था, क्योंकि न INDIA गठबंधन ने और न कांग्रेस ने मुलाकात का कोई अनुरोध भेजा था। यह बयान एशियानेट न्यूज़ेबल ने छापा है।

किसने क्या कहा: एक नज़र में

पक्षमुख्य बातस्रोत
राहुल गांधीसिर्फ CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे; पुलिस ने आयोग तक जाने नहीं दिया।आज तक, ANI, IANS
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गेनेता प्रतिपक्ष को शांतिपूर्ण धरने से जबरन हटाना लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल है।ANI
दिल्ली पुलिसमार्च की अनुमति न मांगी गई, न दी गई; धारा 163 लागू थी; हिरासत कानून-व्यवस्था के लिए।ANI, दैनिक जागरण
चुनाव आयोगशाम 4 बजे तक किसी ने समय नहीं मांगा; 240 सांसदों से संसद एनेक्सी में मिलने की मांग असामान्य; अधिकारी भेजने की पेशकश ठुकराई गई।द स्टेट्समैन, India.com
भाजपायह रोज़ का ड्रामा है; आयोग के बयान से राहुल गांधी का दावा गलत साबित हुआ।ANI, एशियानेट न्यूज़ेबल

धारा 163 क्या है, और हिरासत गिरफ्तारी से कैसे अलग है

BNSS की धारा 163 वही प्रावधान है जो 1 जुलाई 2024 से पहले दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 था। आउटलुक की एक व्याख्या के अनुसार इसके तहत ज़िला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट लिखित आदेश से किसी इलाके में सभा, जुलूस या प्रदर्शन पर रोक लगा सकते हैं। ऐसा आदेश आम तौर पर दो महीने तक रहता है और राज्य सरकार इसे अधिकतम छह महीने तक बढ़ा सकती है। उसी व्याख्या में सुप्रीम कोर्ट के 2018 के मज़दूर किसान शक्ति संगठन फैसले का ज़िक्र है, जिसमें अदालत ने कहा था कि नियमन को पूरी रोक नहीं बनाया जा सकता।

जिन भारतीय रिपोर्टों को हमने पढ़ा, उन सबमें लिखा है कि नेताओं को हिरासत में लेकर कुछ घंटे बाद छोड़ दिया गया। अल जज़ीरा ने अपनी हेडलाइन में “briefly arrested” लिखा है। कानून में गिरफ्तारी अलग चीज़ है: संविधान के अनुच्छेद 22(2) के अनुसार गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है। किसी रिपोर्ट में ऐसी कार्रवाई या किसी मुकदमे का ज़िक्र नहीं है।

अदालत में क्या चल रहा है

सोमवार, 5 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने ज्ञानेश कुमार को एकतरफा अंतरिम आदेश से निलंबित करने की मांग नहीं मानी, लाइव लॉ ने लिखा। पीठ ने कहा कि पहले दूसरे पक्ष को सुनना होगा। अदालत ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि कानून का पालन अनिवार्य है और उल्लंघन मिला तो अदालत उसे पलट देगी, और यह साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने बदले हुए फॉर्म 6 को मंज़ूरी नहीं दी है। लाइव लॉ की रिपोर्ट में अगली सुनवाई की तारीख नहीं दी गई है।

इसका मतलब क्या है

मंगलवार की घटना पर दो अलग कहानियां हैं, और दोनों के बीच का फर्क ही आगे की राजनीति तय करेगा। विपक्ष का कहना है कि करोड़ों मतदाताओं के प्रतिनिधियों को आयोग तक जाने नहीं दिया गया। आयोग का कहना है कि उससे औपचारिक रूप से समय मांगा ही नहीं गया, और जब पुलिस के ज़रिए मांग पहुंची तो वह 240 सांसदों से संसद परिसर में मिलने की थी, जो उसकी प्रक्रिया से बाहर है। अब देखने की बात यह है कि विपक्ष औपचारिक रूप से समय मांगकर छोटा प्रतिनिधिमंडल भेजता है या सड़क का रास्ता ही जारी रखता है।

दूसरी बात अदालत की है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल CEC को निलंबित करने से इनकार किया है, लेकिन याचिकाओं को खारिज नहीं किया और फॉर्म 6 पर अपनी स्थिति साफ की है। इसलिए विवाद का कानूनी फैसला वहीं होगा, सड़क पर नहीं। तीसरी बात विपक्ष की एकजुटता की है: ETV भारत के अनुसार कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि बीजू जनता दल के सांसद भी साथ आए हैं, जो औपचारिक रूप से गठबंधन में नहीं है। मार्च का पहला हिस्सा हमारी कल की रिपोर्ट में है: INDIA गठबंधन के सांसदों को संसद मार्ग पर रोका गया।

आगे क्या

  • ANI के अनुसार आम आदमी पार्टी बुधवार को दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर पर प्रदर्शन में शामिल हो सकती है।
  • 8 अक्टूबर को तेलंगाना में कांग्रेस और सहयोगी दलों ने लोक भवन के घेराव का ऐलान किया है।
  • 1 नवंबर को दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की घोषणा है।
  • सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं पर अगली सुनवाई।

नोट: जो बयान अंग्रेज़ी रिपोर्टों से लिए गए हैं, वे यहां भावार्थ के रूप में दिए गए हैं। पूरे वाक्य के उद्धरण सिर्फ वही हैं जो हिंदी स्रोतों में इसी रूप में छपे हैं।

स्रोत / संदर्भ

प्रस्तुति
हिंदी डेस्क

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