30 सितंबर: डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म ‘द पैम्फलेट’ (The Pamphlet) ने कहा है कि जनस्वास्थ्य कार्यकर्ता और रैनबैक्सी मामले के व्हिसलब्लोअर दिनेश ठाकुर तथा उनकी संस्था ठाकुर फैमिली फाउंडेशन ने उस पर और उसकी टीम के 9 पत्रकारों पर 10 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा किया है। 28 सितंबर को अपने यूट्यूब चैनल पर जारी वीडियो के विवरण में द पैम्फलेट ने लिखा, “दिनेश ठाकुर, हम डरेंगे नहीं, हम संविधान के रास्ते से लड़ेंगे।”
ताज़ा अपडेट: फाउंडेशन का जवाब
The Press of Asia के सवालों पर 30 सितंबर को भेजे ईमेल जवाब में ठाकुर फाउंडेशन ने कहा है कि उसने विजय पटेल, द पैम्फलेट और उसके कर्मचारियों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। जवाब में फाउंडेशन ने मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण इस समय आगे टिप्पणी करने से इनकार किया है।
इस जवाब में हर्जाने की रकम, कर्मचारियों की संख्या या अदालत का नाम नहीं बताया गया है। इसलिए ₹10 करोड़, 9 पत्रकारों और बॉम्बे हाई कोर्ट का विवरण अभी द पैम्फलेट के कथन के आधार पर ही दिया जा रहा है। मुकदमा दायर होना किसी पक्ष के आरोपों पर अदालत का निष्कर्ष नहीं है।
मुख्य बातें
- दावा किसका है: यह जानकारी द पैम्फलेट के 28 सितंबर के यूट्यूब वीडियो “दिनेश ठाकुर को The Pamphlet का जवाब: हम डरेंगे नहीं” से आई है।
- रकम और पक्ष: चैनल के अनुसार 10 करोड़ रुपये का मुकदमा द पैम्फलेट और उसकी टीम के 9 पत्रकारों के खिलाफ है।
- अदालत: वीडियो के विवरण में बॉम्बे हाई कोर्ट का जिक्र है। हम अदालत के रिकॉर्ड से इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सके।
- दूसरा पक्ष: The Press of Asia को भेजे ईमेल जवाब में ठाकुर फाउंडेशन ने विजय पटेल, द पैम्फलेट और उसके कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दायर करने की बात कही है। मामला विचाराधीन होने के कारण उसने आगे टिप्पणी नहीं की।
- पृष्ठभूमि: अगस्त 2026 में कुछ प्लेटफॉर्म्स और टिप्पणीकारों ने फाउंडेशन की फंडिंग पर सवाल उठाए थे। ठाकुर ने तब कहा था कि फाउंडेशन के सभी अनुदान कानून के मुताबिक हैं।
द पैम्फलेट ने क्या कहा
द पैम्फलेट ने वीडियो के विवरण में लिखा, “The Pamphlet और हमारी टीम के 9 पत्रकारों पर ₹10 करोड़ का मुकदमा हुआ है।” चैनल ने इसे प्रेस की आज़ादी से जुड़ा मामला बताया है और कहा है कि वह कानूनी रास्ते से इसका मुकाबला करेगा। मुकदमे में किन बातों को मानहानिकारक बताया गया है और क्या कोई अंतरिम राहत, जैसे सामग्री हटाने का आदेश, मांगी गई है, यह चैनल के सार्वजनिक विवरण से साफ नहीं है।
विवाद की पृष्ठभूमि
न्यूज़ग्राम की 18 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में कुछ टिप्पणीकारों और प्लेटफॉर्म्स ने, जिनमें द पैम्फलेट भी शामिल था, ठाकुर फैमिली फाउंडेशन की ओर से कुछ मीडिया संस्थानों और पत्रकारों को दिए गए अनुदानों पर सवाल उठाए थे। इन पोस्ट और वीडियो में फाउंडेशन और उसके संस्थापक पर कई आरोप लगाए गए थे।
न्यूज़ग्राम के अनुसार, दिनेश ठाकुर ने 15 अगस्त को X पर जवाब देते हुए कहा था कि फाउंडेशन के सभी अनुदान कानून के अनुरूप हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि फाउंडेशन ने राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (NIPFP) और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों जैसे सरकारी संस्थानों को भी अनुदान दिए हैं। खुद को “राष्ट्रविरोधी” बताए जाने पर उन्होंने कहा था कि उन्हें हैरानी है, क्योंकि पिछले एक दशक में मौजूदा सरकार ने उन्हें कई स्तरों पर आमंत्रित किया और उनके साथ काम किया है। न्यूज़ग्राम के मुताबिक, उन्होंने तब यह भी कहा था कि उन्हें बदनाम करने वालों के खिलाफ वह कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।
कौन हैं दिनेश ठाकुर
दिनेश ठाकुर दवा कंपनी रैनबैक्सी के पूर्व अधिकारी हैं, जिन्होंने कंपनी में दवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी गड़बड़ियों को अमेरिकी अधिकारियों के सामने उजागर किया था। इस मामले में 2013 में रैनबैक्सी ने अमेरिका में दोष स्वीकार किया था और 50 करोड़ डॉलर चुकाए थे। व्हिसलब्लोअर के तौर पर ठाकुर को इस निपटारे का हिस्सा मिला था। वह भारत में दवाओं की गुणवत्ता और नियमन पर लगातार लिखते और बोलते रहे हैं, और “द ट्रुथ पिल” किताब के सह-लेखक हैं। वह ठाकुर फैमिली फाउंडेशन के संस्थापक हैं, जो जनस्वास्थ्य, नागरिक स्वतंत्रता, न्यायिक सुधार और नीति शोध जैसे क्षेत्रों में अनुदान देता है।
द पैम्फलेट से जुड़ा एक और मामला
बार एंड बेंच और न्यूज़लॉन्ड्री के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने 24 अगस्त को CJP के प्रवक्ता सौरव दास की एक याचिका पर द पैम्फलेट, अभिजीत अय्यर-मित्रा, लॉ बीट, द जयपुर डायलॉग्स और द संडे गार्डियन को समन जारी किया था। सौरव दास का आरोप है कि उनका निजी पता और व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक कर दी गई। उन्होंने 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का हर्जाना मांगा है। यह मामला दिनेश ठाकुर के कथित मुकदमे से अलग है।
आगे क्या
मुकदमे की सुनवाई होने पर यह साफ होगा कि किन बयानों या वीडियो को आपत्तिजनक बताया गया है और अदालत शुरुआती तौर पर क्या रुख अपनाती है। अदालत का रिकॉर्ड या कोई नया पक्ष उपलब्ध होने पर यह खबर फिर अपडेट की जाएगी।
हमारी जांच के बारे में: यह खबर द पैम्फलेट के सार्वजनिक वीडियो, पहले उद्धृत रिपोर्टों और ठाकुर फाउंडेशन के ईमेल जवाब पर आधारित है। हमने 30 सितंबर को फाउंडेशन की वेबसाइट पर दिए गए पते information@thakur-foundation.org पर सवाल भेजे थे। जवाब उसी दिन contact@pressofasia.com पर मिला। मूल ईमेल हमारे इनबॉक्स में है; उसमें भेजने वाले के रूप में फाउंडेशन का यही पता दर्ज है और वह हमारे भेजे ईमेल के उत्तर में आया है। अदालत के रिकॉर्ड, हर्जाने की रकम और प्रतिवादियों की पूरी सूची की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
अपडेट नोट: फाउंडेशन के उपलब्ध कराए गए जवाब और विजय पटेल के उल्लेख को जोड़कर यह लेख अपडेट किया गया है। मूल प्रकाशन की तारीख और लेख का लिंक बरकरार है। 2 अक्टूबर को इसमें ईमेल के स्रोत की जानकारी जोड़ी गई।
स्रोत / संदर्भ
- The Pamphlet (YouTube, 28 सितंबर): दिनेश ठाकुर को The Pamphlet का जवाब: हम डरेंगे नहीं
- NewsGram: CJP Funding Mystery: Founder Dinesh Thakur Responds to ‘Anti-National’ Allegations
- Bar and Bench: Delhi HC issues summons to Abhijit Iyer Mitra, The Pamphlet, X, others on suit by Saurav Das
- Newslaundry: HC summons Abhijit Iyer-Mitra, Pamphlet, others after Saurav Das points to disclosure of his address





