मुंबई, 26 सितंबर: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 18 सितंबर को खत्म हफ्ते में 14.88 अरब डॉलर घटकर 765.90 अरब डॉलर रह गया। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के शुक्रवार को जारी साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक यह नवंबर 2024 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। इसकी बड़ी वजह रुपये को संभालने के लिए RBI की डॉलर बिक्री मानी जा रही है।
मुख्य बातें
- कुल भंडार: 780.78 अरब डॉलर से घटकर 765.90 अरब डॉलर (−14.88 अरब डॉलर)।
- 4 सितंबर को खत्म हफ्ते में भंडार 785.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था।
- विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) 14.82 अरब डॉलर घटकर 630.98 अरब डॉलर।
- सोने का भंडार 6.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 111.29 अरब डॉलर।
- IDFC फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता के मुताबिक इसमें 10.9 अरब डॉलर की वास्तविक डॉलर बिक्री थी, बाकी गिरावट पुनर्मूल्यांकन (revaluation) के कारण।
- शुक्रवार, 25 सितंबर को रुपया 19 पैसे मज़बूत होकर 95.80 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
आंकड़े: कहां कितनी गिरावट
| घटक | 18 सितंबर वाला हफ्ता | बदलाव |
|---|---|---|
| कुल विदेशी मुद्रा भंडार | 765.90 अरब डॉलर | −14.88 अरब डॉलर |
| विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) | 630.98 अरब डॉलर | −14.82 अरब डॉलर |
| सोना | 111.29 अरब डॉलर | +0.07 अरब डॉलर |
| विशेष आहरण अधिकार (SDR) | 18.74 अरब डॉलर | −0.11 अरब डॉलर |
| IMF में रिज़र्व स्थिति | 4.89 अरब डॉलर | −0.03 अरब डॉलर |
स्रोत: RBI साप्ताहिक आंकड़े, PTI और Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार।
भंडार क्यों घटा
लगभग पूरी गिरावट विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में आई, यानी डॉलर और दूसरी विदेशी मुद्राओं में रखी रकम में। इस मद में यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राओं के डॉलर के मुकाबले उतार-चढ़ाव का असर भी दिखता है, इसलिए पूरी गिरावट को डॉलर बिक्री नहीं माना जा सकता। गौरा सेन गुप्ता के अनुसार 10.9 अरब डॉलर की असली बिक्री हुई और बाकी नुकसान पुनर्मूल्यांकन का था।
RBI ने डॉलर इसलिए बेचे क्योंकि रुपये पर लगातार दबाव है। Business Standard से बात करते हुए एक सरकारी बैंक के डीलर ने दो वजहें गिनाईं — कच्चा तेल 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5% से ऊपर। महंगे तेल से आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग बढ़ती है; ऊंची अमेरिकी यील्ड विदेशी निवेशकों को भारत से पैसा निकालने की वजह देती है। गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शेयर बाज़ार से 5,027.36 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।
भंडार पहले इतना ऊपर कैसे गया था?
इस साल भंडार में तेज़ बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह RBI की FCNR(B) डिपॉज़िट स्वैप योजना रही। Business Standard की रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना के तहत 18 सितंबर तक 143.6 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह जुटाया गया। इसी वजह से 4 सितंबर वाले हफ्ते में भंडार 785.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड पर पहुंचा। यानी मौजूदा गिरावट के बाद भी भंडार ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर है।
रुपये का हाल
शुक्रवार को रुपया 95.92 पर खुला और 19 पैसे चढ़कर 95.80 प्रति डॉलर पर बंद हुआ; गुरुवार को यह 26 पैसे गिरकर 95.99 पर बंद हुआ था। बाज़ार के जानकारों का अनुमान है कि निकट भविष्य में रुपया 95.60 से 96.10 के दायरे में रह सकता है और 96 के आसपास पहुंचने पर RBI दखल दे सकता है। उसी दिन ब्रेंट क्रूड करीब 105.45 डॉलर प्रति बैरल पर था और डॉलर इंडेक्स 101.10 के आसपास।
आपके लिए इसका क्या मतलब
- आयात महंगा: कमज़ोर रुपये से कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन के पुर्ज़े और खाद्य तेल जैसे आयात महंगे पड़ते हैं। सरकार ने हाल में खाद्य तेल पर आयात शुल्क घटाया है (पढ़ें)।
- विदेश में पढ़ाई और यात्रा: फीस और खर्च डॉलर में होने से रुपये में लागत बढ़ती है।
- विदेश से पैसा भेजने वालों को फायदा: NRI परिवारों को हर डॉलर पर ज़्यादा रुपये मिलते हैं।
- घबराने की ज़रूरत नहीं: 766 अरब डॉलर का भंडार अब भी कई महीनों के आयात के लिए पर्याप्त माना जाता है और RBI को रुपये में तेज़ उतार-चढ़ाव रोकने की गुंजाइश देता है।
बाज़ार और वैश्विक पृष्ठभूमि
रुपये पर दबाव उसी माहौल का हिस्सा है जिसमें भारतीय शेयर बाज़ार लगातार सात हफ्तों से गिरावट में है (Nifty की सातवीं साप्ताहिक गिरावट) और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ने इस महीने ब्याज दरें बढ़ाई हैं।
आगे क्या देखें
- अगले शुक्रवार को RBI के साप्ताहिक आंकड़े बताएंगे कि डॉलर बिक्री जारी रही या नहीं।
- कच्चे तेल के दाम और होर्मुज़ के आसपास तनाव रुपये की दिशा तय करेंगे।
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और FII प्रवाह पर नज़र रहेगी।





