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CJP मामला: मेट्रो-ट्रेन बंदी पर सुप्रीम कोर्ट ने गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और DMRC प्रमुख को अवमानना नोटिस दिया; दिपके, दास और रांका एक साल शांति की शर्त पर रिहा

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11 अक्टूबर: सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दिन दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाएं बंद करने के मामले में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और DMRC प्रमुख डी. थारा को अवमानना नोटिस जारी किया, द ट्रिब्यून ने बताया। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने तीनों से हलफनामा और 9 अक्टूबर के आदेश के पालन की रिपोर्ट मांगी है। इसी दिन CJP के अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को करीब 24 घंटे की एहतियाती हिरासत के बाद एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा कर दिया गया।

मुख्य बातें

  • 9 अक्टूबर को CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा था कि केंद्र दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेनों पर “पूरी रोक” से बचे और “उचित रूप से नियंत्रित तरीके” से काम करे, ताकि आम जनता को कम से कम परेशानी हो, द ट्रिब्यून ने बताया।
  • अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका में आरोप है कि इस आदेश के बावजूद कई मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए और इन पाबंदियों ने राजधानी का “जनजीवन ठप” कर दिया। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
  • दिल्ली कैंट के विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने तीनों नेताओं को ₹50,000 के मुचलके पर रिहा किया, दिल्ली पुलिस के बयान के हवाले से बिज़नेस टुडे ने बताया। उन्हें BNSS की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती तौर पर गिरफ्तार किया गया था।
  • रिहाई के बाद CJP ने आंदोलन को देशव्यापी बनाने का ऐलान किया। सौरव दास ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन नहीं रुकेगा, द वीक ने बताया।
  • दिपके ने कहा कि वे घर जा रहे हैं क्योंकि उनकी दादी का निधन हो गया है, दैनिक जागरण ने बताया।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ

अवमानना याचिका: अब तक
बिंदुजानकारीस्रोत
बेंचजस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना (रविवार की विशेष सुनवाई)द ट्रिब्यून
किसे नोटिसकेंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार, DMRC प्रमुख डी. थाराद ट्रिब्यून
क्या मांगाअवमानना याचिका पर हलफनामा, और 9 अक्टूबर के आदेश के पालन की रिपोर्टद ट्रिब्यून
अगली सुनवाईमंगलवारद ट्रिब्यून
मूल आदेश (9 अक्टूबर)57 मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनें रद्द करने के खिलाफ याचिका पर: “पूरी रोक” न हो, नियंत्रित तरीके से काम होद ट्रिब्यून
याचिकाकर्ताअधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठीद ट्रिब्यून, न्यूज़ड्रम

9 अक्टूबर की सुनवाई में 57 मेट्रो स्टेशनों की बंदी का मामला था, जबकि शनिवार को DMRC ने करीब 45 स्टेशनों के गेट बंद रखे और 245 से ज़्यादा ट्रेनें रद्द रहीं, जैसा हमने अपनी पिछली रिपोर्टों में बताया था। अब अदालत को देखना है कि यह उसके “पूरी रोक न हो” वाले निर्देश के अनुरूप था या नहीं। अवमानना नोटिस का मतलब यह नहीं है कि अधिकारियों को दोषी माना गया है; उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।

रिहाई: किस शर्त पर

CJP नेताओं की रिहाई
बिंदुजानकारीस्रोत
किसकी रिहाईअभिजीत दिपके, सौरव दास, आशुतोष रांकाबिज़नेस टुडे
हिरासत का आधारBNSS की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती गिरफ्तारीबिज़नेस टुडे
किसने रिहा कियाविशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत, दिल्ली कैंटदिल्ली पुलिस, बिज़नेस टुडे के ज़रिए
शर्तएक साल तक शांति और अच्छा आचरण बनाए रखनाCJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह; दिल्ली पुलिस
मुचलका₹50,000 (हर व्यक्ति पर या कुल, यह साफ नहीं)दिल्ली पुलिस, बिज़नेस टुडे के ज़रिए
हिरासत की अवधिकरीब 24 घंटे (शनिवार सुबह से रविवार सुबह तक)दैनिक जागरण

दिपके ने रिहाई के बाद कहा कि ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए पूरी दिल्ली रोक दी गई, और सवाल किया कि ज्ञानेश कुमार के पास ऐसा क्या है कि उन्हें बचाने के लिए लाखों लोगों को परेशान किया गया, दैनिक जागरण ने बताया। पुलिस का कहना है कि उन्होंने दिपके को हिरासत के दौरान उनकी दादी के निधन की जानकारी दी थी और घर जाने में मदद की पेशकश की थी; दिपके और उनके परिवार ने पुलिस के इस दावे पर सवाल उठाए हैं।

सौरव दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में युवाओं से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए सड़कों पर आने की अपील की और कहा कि प्रदर्शन सिर्फ दिल्ली में नहीं, पूरे देश में होंगे, द वीक ने बताया। उन्होंने रिहाई की शर्त के बारे में कहा कि उनसे एक साल तक शांति भंग न करने को कहा गया है, और शांति भंग के लिए सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त को ज़िम्मेदार ठहराया। CJP ने प्रदर्शनों की तारीखें अभी नहीं बताई हैं।

नोट: दिपके और दास के बयान अंग्रेज़ी रिपोर्टों से लिए गए हैं; हमने उनका हिंदी भाव दिया है।

आगे क्या

  • मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना मामले की अगली सुनवाई, और गृह सचिव, पुलिस आयुक्त व DMRC के हलफनामे।
  • सोमवार, 12 अक्टूबर को INDIA गठबंधन का प्रदर्शन।
  • CJP के देशव्यापी प्रदर्शनों की तारीखें, और एक साल की शर्त का उन पर असर।
  • बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का क्या होता है, अब जब तीनों नेता रिहा हो चुके हैं।

इसका मतलब क्या है

दो दिन में तस्वीर बदल गई है। शनिवार को सरकार ने मेट्रो, ट्रेन और इंटरनेट बंद करके प्रदर्शन को शुरू होने से पहले रोक दिया; रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने सवाल पूछा कि क्या यह उसके अपने आदेश के खिलाफ था। तीनों नेता रिहा हैं, लेकिन एक साल की शांति की शर्त के साथ, जिसका उल्लंघन होने पर उन पर कार्रवाई हो सकती है। ऐसे में CJP का अगला कदम, यानी देशव्यापी प्रदर्शन, यह तय करेगा कि आंदोलन सड़क पर कितना आगे बढ़ता है और अदालत की निगरानी में प्रशासन कितनी सख्ती करता है।

हमारी पिछली रिपोर्ट: CJP: 7,000+ हिरासत में, दिपके अब भी हिरासत में।

स्रोत / संदर्भ

प्रस्तुति
हिंदी डेस्क

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