नागोया, 25 सितंबर 2026: सुरुचि इंदर सिंह और कमलजीत की भारतीय जोड़ी ने एशियन गेम्स 2026 की 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत के निशानेबाजी अभियान को बड़ी सफलता दिलाई। एशियन शूटिंग कन्फेडरेशन के आधिकारिक परिणाम में भारत को पहला, दक्षिण कोरिया को दूसरा और ईरान को तीसरा स्थान मिला।
आकाशवाणी के अनुसार भारतीय जोड़ी ने फाइनल में 484.6 अंक बनाए और दक्षिण कोरिया की होंग सुह्योन तथा चू गाएउन की जोड़ी को 6.6 अंक से पीछे छोड़ा। कोरियाई जोड़ी ने 478.0 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया। ईरान के हानियेह रोस्तमियान और वाहिद गोलखंदान ने कांस्य पदक जीता।
क्वालिफिकेशन से फाइनल तक भारत का दबदबा
सुरुचि और कमलजीत ने क्वालिफिकेशन में भी मजबूत प्रदर्शन किया था। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने 587-29x का स्कोर बनाकर शीर्ष स्थान हासिल किया और पदक दौर में पहुंचे। फाइनल में दोनों ने संयम बनाए रखा, नियमित रूप से ऊंचे स्कोर लगाए और अंतिम चरण में कोरिया की चुनौती को पीछे छोड़ दिया।
484.6 अंक का विजयी स्कोर नया गेम्स रिकॉर्ड बताया गया है। पिछला एशियाई रिकॉर्ड 481.3 अंक था, जिसे भारतीय जोड़ी ने 3.3 अंक से बेहतर किया। यह अंतर तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि 10 मीटर एयर पिस्टल में मामूली चूक भी कुल स्कोर और पदक क्रम बदल सकती है।
इस सफलता की खास बात यह भी रही कि दोनों खिलाड़ी व्यक्तिगत स्पर्धा में अपेक्षित परिणाम नहीं हासिल कर सके थे। मिक्स्ड टीम मुकाबले में उन्हें दूसरा मौका मिला और उन्होंने दबाव को साझेदारी में बदल दिया। फाइनल में एक खिलाड़ी की कमजोर सीरीज को दूसरे की स्थिरता संभाल सकती है; भारत की जोड़ी ने इसी संतुलन का प्रदर्शन किया।
भारत के अभियान के लिए क्यों अहम है यह गोल्ड
यह एशियन गेम्स 2026 में भारत का निशानेबाजी में पहला स्वर्ण और कुल मिलाकर दूसरा गोल्ड था। भारतीय महिला क्रिकेट टीम पहले ही स्वर्ण जीत चुकी थी। शूटिंग में इससे पहले कई रजत और कांस्य पदक आए थे, इसलिए मिक्स्ड टीम का गोल्ड दल के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त भी लेकर आया।
भारत के निशानेबाजों ने इन खेलों में लगातार फाइनल तक पहुंचकर गहराई दिखाई है। इससे पहले भारत के लिए रोशिबिना देवी, रोइंग और मिक्स्ड स्कीट में पदक आए थे। भारोत्तोलन में मीराबाई चानू ने 198 किलोग्राम के कुल भार के साथ रजत पदक जीता था।
मिक्स्ड टीम इवेंट भारत के लिए विशेष रणनीतिक महत्व रखते हैं। यहां चयन सिर्फ व्यक्तिगत रैंकिंग पर निर्भर नहीं करता; कोचिंग स्टाफ को दो खिलाड़ियों की लय, मानसिक तालमेल और मुकाबले के प्रारूप को साथ देखकर जोड़ी बनानी होती है। सुरुचि और कमलजीत की सफलता बताती है कि अंतिम समय का संयोजन भी सही तैयारी और स्पष्ट भूमिकाओं के साथ परिणाम दे सकता है।
10 मीटर एयर पिस्टल में खिलाड़ी एक हाथ से निशाना लगाते हैं और हर शॉट में शरीर की स्थिरता, सांस का नियंत्रण तथा ट्रिगर पर समान दबाव जरूरी होता है। मिक्स्ड टीम प्रारूप में स्कोर दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन से बनता है, इसलिए सिर्फ एक स्टार का असाधारण दौर पर्याप्त नहीं होता। 6.6 अंक की जीत बताती है कि भारतीय जोड़ी ने पूरे फाइनल में सामूहिक निरंतरता बनाए रखी।
राष्ट्रपति ने दी बधाई
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोनों निशानेबाजों को बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन को सटीकता और साझेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। आधिकारिक बधाई संदेशों ने इस उपलब्धि को व्यक्तिगत सफलता से आगे बढ़ाकर भारतीय शूटिंग प्रणाली की सामूहिक उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया।
आगे क्या
इस गोल्ड के बाद भारत की नजर बाकी शूटिंग स्पर्धाओं और अन्य खेलों के फाइनल पर रहेगी। एक रिकॉर्ड जीत पदक तालिका में तत्काल सुधार करती है, लेकिन इसका बड़ा असर आने वाले मुकाबलों में खिलाड़ियों के आत्मविश्वास पर पड़ता है। टीम प्रबंधन के लिए अब चुनौती इस लय को बनाए रखने और खिलाड़ियों को लगातार प्रतियोगिताओं के बीच पर्याप्त रिकवरी देने की होगी।
सुरुचि और कमलजीत की जीत का सबसे स्पष्ट संदेश यह है कि व्यक्तिगत निराशा के बाद भी टीम इवेंट में वापसी संभव है। उन्होंने क्वालिफिकेशन में बढ़त बनाई, फाइनल में उसे बनाए रखा और रिकॉर्ड स्कोर के साथ भारत को शीर्ष पोडियम पर पहुंचाया।
इस पदक से युवा निशानेबाजों को भी संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर केवल व्यक्तिगत स्पर्धा तक सीमित नहीं है। टीम संयोजन, निरंतर स्कोर और दबाव में संवाद उतने ही महत्वपूर्ण हैं। भारतीय शूटिंग के लिए यह जीत पदक तालिका से आगे जाकर चयन और प्रशिक्षण मॉडल की सफलता का प्रमाण बनेगी।
स्रोत: एशियन शूटिंग कन्फेडरेशन के आधिकारिक परिणाम; आकाशवाणी समाचार.




