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अमेरिकी संसद में रूस प्रतिबंध बिल पास, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा; विदेश मंत्रालय बोला- ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं

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नई दिल्ली/वॉशिंगटन — अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (US House of Representatives) ने बुधवार को रूस पर सख्त प्रतिबंधों वाला विधेयक पास कर दिया, जिसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों — जिनमें भारत और चीन शामिल हैं — पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति ट्रंप को मिल जाएगा। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कुछ ही घंटों में जवाब देते हुए कहा कि देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।

मुख्य बिंदु

  • अमेरिकी हाउस ने “Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026” को 262-159 वोटों से पास किया।
  • बिल अगस्त में सीनेट से पहले ही 86-11 वोटों से पास हो चुका है; अब यह राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए जाएगा।
  • कानून बनने पर रूसी तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ और रूस के ऊर्जा सेक्टर व “शैडो फ्लीट” टैंकरों पर नए प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।
  • भारत के विदेश मंत्रालय ने 17 सितंबर को दोपहर बयान जारी कर कहा, “भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
  • मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत ने अमेरिका को अपने व्यापारिक व आर्थिक हितों की रक्षा के लिए “सभी आवश्यक कदम” उठाने का इरादा साफ कर दिया है।

ताज़ा घटनाक्रम

बिल पास होने के कुछ ही घंटों बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत “विविध स्रोतों और बदलते बाज़ार हालात के आधार पर” अपनी ऊर्जा आपूर्ति जारी रखेगा। मंत्रालय के अनुसार, इस विधेयक के भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर पड़ने वाले असर को भारतीय पक्ष ने अमेरिकी अधिकारियों के सामने “स्पष्ट रूप से” रखा है।

क्या हुआ

चुनाव से ठीक पहले, विधायी सत्र के आखिरी दिन हुई वोटिंग में यह बिल 262 के मुकाबले 159 वोटों से पास हुआ। समर्थन में 203 रिपब्लिकन, 58 डेमोक्रेट्स और 1 निर्दलीय सांसद रहे, जबकि विरोध में 7 रिपब्लिकन और 152 डेमोक्रेट्स ने वोट डाला। दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर लाया गया यह विधेयक राष्ट्रपति को रूस के ऊर्जा निर्यात और प्रतिबंध चकमा देने वाले टैंकर बेड़े (“शैडो फ्लीट”) पर नए प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है, साथ ही रूसी तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की छूट भी देता है। हालांकि, टैरिफ की सटीक दर और लागू करने का समय पूरी तरह राष्ट्रपति ट्रंप के विवेक पर छोड़ा गया है।

पृष्ठभूमि

अमेरिका लंबे समय से भारत और चीन पर रूसी तेल खरीद कम करने का दबाव बनाता रहा है, क्योंकि वाशिंगटन का मानना है कि यह राजस्व रूस की यूक्रेन युद्ध-मशीनरी को फंड कर रहा है। भारत हमेशा से कहता आया है कि उसकी ऊर्जा नीति पूरी तरह बाज़ार-आधारित है और सस्ते रूसी क्रूड ने घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रण में रखने में अहम भूमिका निभाई है। द प्रेस ऑफ एशिया की पिछली रिपोर्ट में बताया गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बढ़ते तनाव से पहले ही भारत की तेल आपूर्ति पर असर की आशंका जताई जा रही थी — अब यह नया अमेरिकी दबाव भारत की ऊर्जा रणनीति के लिए एक और चुनौती बनकर सामने आया है।

क्यों महत्वपूर्ण है

अगर राष्ट्रपति ट्रंप इस कानून के तहत भारत पर वास्तव में भारी टैरिफ लगाने का फैसला करते हैं, तो इसका सीधा असर भारत के निर्यात, द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों पर पड़ सकता है। साथ ही, यह भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सामरिक साझेदारी के माहौल में एक नया तनाव बिंदु भी बन सकता है। दूसरी ओर, टैरिफ का दायरा और समय राष्ट्रपति के विवेकाधिकार पर होने से यह भी संभव है कि व्यावहारिक कूटनीतिक बातचीत से कोई बीच का रास्ता निकाला जाए।

भारत पर असर

भारत रूस से रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है, जिसने बीते कुछ वर्षों में घरेलू पेट्रोल-डीजल कीमतों को स्थिर रखने में मदद की है। अगर अमेरिका वास्तव में भारी टैरिफ लगाता है, तो भारतीय तेल कंपनियों को आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत तेज़ी से तलाशने पड़ सकते हैं, जिससे ईंधन की लागत बढ़ने का जोखिम रहेगा। इसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही $108 प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं।

आगे क्या

अब सबकी नज़र राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर और इसके बाद जारी होने वाले कार्यकारी दिशा-निर्देशों पर होगी, जिनसे यह स्पष्ट होगा कि टैरिफ किन शर्तों पर और कब से लागू होंगे। भारत सरकार की ओर से अमेरिकी प्रशासन के साथ बातचीत जारी रहने की उम्मीद है, ताकि किसी बड़े व्यापारिक झटके से बचा जा सके। एशियाई बाज़ारों पर पहले से जारी दबाव को देखते हुए, निवेशकों की नज़र इस घटनाक्रम पर बनी रहेगी।

स्रोत

  • Business Standard — “Govt committed to ensuring energy security: MEA on US’ Russia sanctions Act”
  • The Week — “‘We will protect our interests’: India reacts as US Congress passes Russia sanctions bill”
  • Deccan Herald — “Russia sanctions bill passed, India reacts as 100% tariff threat looms”

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