नई दिल्ली — अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा इस हफ्ते ब्याज दरों में बढ़ोतरी और आगे और दरें बढ़ाने के संकेत के बाद गुरुवार को भारत में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना दिन में अलग-अलग समय पर करीब 1 प्रतिशत से लेकर 2.7 प्रतिशत तक फिसला, जबकि चांदी में गिरावट इससे भी ज्यादा तेज रही।
मुख्य बिंदु
- अमेरिकी फेड चेयर केविन वॉर्श के आक्रामक (hawkish) रुख और आगे दरें बढ़ाने के संकेत के बाद वैश्विक बाजार में सोने की चमक फीकी पड़ी।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड गिरकर करीब 4,312 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया।
- MCX पर 24 कैरेट सोना अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 1.51 से 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार करता दिखा।
- चांदी की कीमतों में भी 2 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई; अलग-अलग समय पर चांदी करीब 2,300 से 10,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक टूटी।
- यह गिरावट ऐसे समय आई है जब फेड ने 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरें बढ़ाकर 3.75-4 प्रतिशत की सीमा में पहुंचा दी हैं।
ताज़ा घटनाक्रम
गुरुवार को भारतीय कमोडिटी बाजार खुलते ही सोने और चांदी में बिकवाली हावी रही। दिन भर अलग-अलग समय पर आई रिपोर्ट्स में गिरावट के आंकड़े थोड़े अलग-अलग बताए गए — कुछ रिपोर्ट्स में सुबह के कारोबार में सोना करीब 1 प्रतिशत नीचे बताया गया, जबकि दिन बढ़ने के साथ कुछ अन्य रिपोर्ट्स में यह गिरावट बढ़कर करीब 2.7 प्रतिशत तक पहुंचती दिखी। यह अंतर मुख्यतः इसलिए है क्योंकि कमोडिटी कीमतें दिन भर लगातार बदलती रहती हैं और अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स ने अलग-अलग समय पर के भाव दर्ज किए। द प्रेस ऑफ एशिया ने इनमें से किसी एक आंकड़े को अंतिम सच नहीं माना है, बल्कि दिन भर की व्यापक प्रवृत्ति — यानी लगातार गिरावट — को रिपोर्ट किया है।
क्या हुआ
असल वजह अमेरिका में है। फेडरल रिजर्व ने इस हफ्ते ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हुए दरों को 3.75-4 प्रतिशत की सीमा में पहुंचा दिया, जो 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी है। फेड चेयर केविन वॉर्श की हालिया टिप्पणियों ने बाजार को यह संकेत दिया कि आगे भी दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि निवेशकों के लिए बॉन्ड और डिपॉजिट जैसे ब्याज देने वाले विकल्प ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं। इसी वजह से फेड के फैसले के तुरंत बाद वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में बिकवाली शुरू हुई, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा, क्योंकि घरेलू सोने की कीमतें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय भाव और डॉलर-रुपया विनिमय दर से तय होती हैं।
पृष्ठभूमि
सोने की कीमतें इस साल पहले कई बार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी थीं, जिसकी एक बड़ी वजह वैश्विक अनिश्चितता और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी रही है। लेकिन फेड की हालिया सख्ती ने इस तेजी पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। द प्रेस ऑफ एशिया पहले फेड की ब्याज दर बढ़ोतरी और उसके बाद अमेरिकी शेयर बाजार में आई गिरावट की खबर दे चुका है। सोने-चांदी में आज की गिरावट उसी फैसले का सीधा असर है।
क्यों महत्वपूर्ण है
भारत सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजारों में से एक है, जहां त्योहारी और शादी के सीजन में सोने की मांग खासतौर पर बढ़ जाती है। कीमतों में गिरावट आम उपभोक्ताओं और आभूषण खरीदारों के लिए राहत की बात हो सकती है, जबकि हाल में सोना खरीदने वाले निवेशकों के लिए यह नुकसान की खबर है। ज्वैलर्स और बुलियन डीलरों के लिए भी यह उतार-चढ़ाव मायने रखता है, क्योंकि इससे उनकी इन्वेंट्री की वैल्यूएशन पर असर पड़ता है।
भारत पर असर
भारत में सोने की कीमतें आयात शुल्क, अंतरराष्ट्रीय भाव और डॉलर-रुपया विनिमय दर के मिश्रण से तय होती हैं, इसलिए फेड जैसे वैश्विक फैसलों का असर सीधे घरेलू बाजार पर दिखता है। आने वाले हफ्तों में अगर फेड और दरें बढ़ाने की तरफ बढ़ता है, तो सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है, हालांकि भारत में त्योहारी मांग इस असर को कुछ हद तक संतुलित कर सकती है।
आगे क्या
बाजार की निगाहें अब फेड के आगे के बयानों और आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि दरों में और बढ़ोतरी कितनी जल्दी और कितनी होती है। भारतीय बुलियन बाजार में निवेशक और ज्वैलर्स दोनों ही डॉलर-रुपया विनिमय दर और अंतरराष्ट्रीय सोने के रुझान पर नजर बनाए रखेंगे।
स्रोत
- India TV News — “Gold falls nearly Rs 2k, silver down 2% on MCX after Fed rate hike”
- HDFC Sky — “Gold Plunges 2.7% as $4,312 Spot Rate Rattles MCX; Silver Down 4% on Fed Rate-Hike Bets”
- Zee Business — “Gold, Silver Prices Today: Gold falls nearly 1% on MCX after Fed rate hike”
यह भी पढ़ें: फेड ने बढ़ाई ब्याज दरें, 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी, फेड के फैसले के बाद डाओ जोन्स में गिरावट और Fed hike bets से पहले सोने पर दबाव (7 सितंबर की रिपोर्ट)।
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