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IMD अलर्ट: दिल्ली-यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी

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नई दिल्ली — मानसून की विदाई के अंतिम दौर में एक बार फिर सक्रिय होकर भारत के बड़े हिस्से में गुरुवार को भारी बारिश, गरज-चमक और तेज आंधी का दौर लौट आया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के हवाले से कई मीडिया रिपोर्ट्स में दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित उत्तर व पूर्वी भारत के एक दर्जन से अधिक राज्यों में बारिश और आंधी की चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।

मुख्य बिंदु

  • बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी तंत्र के असर से उत्तर और पूर्वी भारत में मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ी है।
  • दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया गया है।
  • अलग-अलग रिपोर्ट्स में हवा की रफ्तार करीब 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई है।
  • कुछ रिपोर्ट्स में नदियों के किनारे न जाने की सलाह के साथ बाढ़ जैसी स्थिति की आशंका भी जताई गई है।
  • प्रभावित राज्यों की सही संख्या को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में 10 से 20 तक के भिन्न आंकड़े सामने आए हैं, जो अलग-अलग समय पर जारी पूर्वानुमान अवधि (अगले कुछ घंटे बनाम अगले कुछ दिन) पर निर्भर करता है।

ताज़ा घटनाक्रम

गुरुवार सुबह से ही उत्तर भारत के कई हिस्सों में आसमान में बादल छाए रहे और दिन बढ़ने के साथ गरज-चमक वाली बारिश शुरू हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों के लिए दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी बारिश और गरज-चमक की गतिविधि बढ़ सकती है, जो दर्शाता है कि यह मौसमी बदलाव केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक स्तर पर देखा जा रहा है।

क्या हुआ

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक यह बदलाव बंगाल की खाड़ी में बने एक मौसमी दबाव तंत्र और मानसून की विदाई से पहले की सामान्य गतिविधि का नतीजा है, जो सितंबर के अंतिम दौर में अक्सर देखी जाती है। ऐसे तंत्र आमतौर पर नमी को उत्तर और मध्य भारत की ओर खींचते हैं, जिससे थमता हुआ मानसून अचानक फिर सक्रिय हो जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार हवाओं की रफ्तार कई जगह 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और यातायात प्रभावित होने का खतरा रहता है। कुछ रिपोर्ट्स में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदियों के पास न जाने की सलाह दी गई है, हालांकि द प्रेस ऑफ एशिया किसी विशेष जिले या नदी के लिए बाढ़ की पुष्टि नहीं कर सकता, क्योंकि यह जानकारी सीधे तौर पर आधिकारिक IMD बुलेटिन से सत्यापित नहीं हो सकी है।

पृष्ठभूमि

भारत में मानसून सामान्यतः सितंबर के अंत तक धीरे-धीरे कमजोर होकर वापसी की ओर बढ़ता है, लेकिन इस दौरान बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनने वाले मौसमी दबाव तंत्र अक्सर बारिश के छोटे लेकिन तीव्र दौर वापस ले आते हैं। पिछले कुछ हफ्तों में भी उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में रुक-रुक कर बारिश दर्ज की गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग समय-समय पर राज्यवार और जिलेवार चेतावनियां जारी करता रहता है, जिन्हें विभिन्न समाचार माध्यम अपनी-अपनी रिपोर्टिंग में अलग-अलग तरीके से प्रस्तुत करते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है

अचानक आने वाली तेज आंधी और भारी बारिश से शहरी इलाकों में जलभराव, यातायात जाम और उड़ानों में देरी जैसी समस्याएं आम हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है, खासकर उस समय जब खरीफ फसल की कटाई नजदीक होती है। तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं से जान-माल के नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना जरूरी माना जाता है।

भारत पर असर

दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के बड़े शहरों में भारी बारिश से रोजमर्रा की आवाजाही और कामकाज प्रभावित हो सकता है। बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में, जहां कई इलाके पहले से ही मानसून की बारिश से संवेदनशील रहते हैं, तेज बारिश से खेतों में जलभराव और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका रहती है। प्रशासन की ओर से आमतौर पर ऐसे अलर्ट के दौरान बिजली विभाग, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए जाते हैं।

आगे क्या

मौसम विभाग की ओर से अगले कुछ दिनों में स्थिति पर लगातार अपडेट जारी किए जाने की उम्मीद है। जैसे-जैसे मौसमी तंत्र आगे बढ़ेगा, बारिश और आंधी का दायरा बदल सकता है। निवासियों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जाती है, खासकर उन इलाकों में जहां पहले से बाढ़ या जलभराव का खतरा रहता है।

स्रोत

यह भी पढ़ें: भारत में सितंबर मानसून 2026: IMD का below-normal rain अनुमान और जुलाई 2026 में उत्तराखंड, हिमाचल और महाराष्ट्र में मानसून से भारी नुकसान

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