प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2026 को एक बड़ी घोषणा करते हुए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित करने का ऐलान किया है। यह टास्क फोर्स राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में सुधार के लिए सिफारिशें देगी। यह फैसला हाल ही में हुए कथित NEET-UG पेपर लीक मामले के बाद आया है, जिसने देशभर में विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया और परीक्षा प्रणाली की साख पर सवाल उठाए।
नीलेकणी ने आधार डिजिटल पहचान प्रनाली और यूनीफाइड पेंंट्स इंतरसेस (UPI) बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। सरकार को उम्मीद है कि सुरक्षित और पारदर्शी बड़े स्तर की डिजिटल प्रणालियों के निर्माण का उनका अनुभव परीक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने में मदद करेगा। टास्क फोर्स में पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, IIIT मद्रास के निदेशक वी. की कामकोड़ी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमित लालमीना शाकिल हैं।
सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि संसद के आने वाले मॉनसून सत्र में संसद में ससंग विरोधी कानून पेश किया जा सकता है, जिसमें परीक्षा पेपर लीक करने वालों के लिए सघन सजाओं का प्रावधान हो। यह कदम नीत आयोग के विरोध में हुई प्रदर्शनों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आया है, जिनके बाद प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
इसी दौरान, सर्वोच्च न्यायालय ने NEET विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज मार्ग की घटनाओं पर सस्ते रुख अपनाते हुए कहा कि पुलिस महज शांतिपूर्वक विरोध होने के आधार पर लाठीचार्ज नहीं कर सकती। न्यायालय ने बिना आपराधिक पूर्व रिकॉर्ड वाले नाबालिग प्रदर्शकों की रिहाई का भी आदेश दिया है और संभवत: घटनाओं की स्वतंत्र जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाने का संकेत भी दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि नीलेकणी की अगुवाई वाली टीम यदि सीमा समय में अपनी सिफारिशें सही ढंग से लागू करवा पाती है, तो इससे लाखों छात्रों की परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बहाल हो सकता है और देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं में प्रतियोगिता परीक्षाओं पर जनता का विश्वास पुनः स्थापित हो सकता है।
