नई दिल्ली: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार, 28 जुलाई 2026 को दिल्ली स्थित रूज़ एवेन्यू कोर्ट में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत के समक्ष 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। यह चार्जशीट आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा तैयार की गई है और इसमें करीब 20,000 पन्नों के दस्तावेज़, 360 गवाह तथा 422 दस्तावेजी साक्ष्य शामिल हैं।
अदालत ने CBI की अंतिम रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए एजेंसी को अनुपूरक दस्तावेज़ (annexures) दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया। CBI के अनुसार, जैसे-जैसे अन्य आरोपियों और संदिग्धों के खिलाफ जांच पूरी होगी, वैसे-वैसे पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
आरोपियों की भूमिका और लगी धाराएं
चार्जशीट में नामित 13 आरोपियों में तीन NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) से जुड़े विषय-विशेषज्ञ मनीषा मंधारे (जीव विज्ञान), प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (रसायन विज्ञान) और मनीषा संजय हवलदार (भौतिक विज्ञान) शामिल हैं। इनके अलावा लातूर स्थित रेणुकाई कैरियर सेंटर कोचिंग संस्थान के संचालक शिवराज रघुनाथ मोतेगांवकर, पुणे स्थित APMA कोचिंग संस्थान के COO तेजस हर्षदकुमार शाह, लातूर के ही डॉक्टर मनोज शिरूरे तथा आठ अन्य मप्पी (middlemen) शामिल हैं। CBI के मुताबिक, प्रश्न पत्र महाराष्ट्र-राजस्थान-हरियाणा और महाराष्ट्र-राजस्थान-केरल रूट से मैसेजिंग एप के जरिये लीक हुआ।
चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धाराएं 315(5), 318(4), 61(2), 238 और 303(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो क्रमशः आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी, सबूत नष्ट करना और साजिश से संबंधित हैं। इसके साथ ही आरोपियों पर Prevention of Corruption Act, 1988 की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(a) तथा Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 की धाराएं 3, 4, 5, 10 और 11 के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद की पृष्ठभूमि
NEET-UG 2026 परीक्षा के दौरान देश के कई केंद्रों से पेपर लीक की शिकायतें सामने आईं, जिसके बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा को रद्द कर पुन: आयोजित किया था। इस मामले ने देशभर में छात्र विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया, जिसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंपी गई थी।
अब तक की गिरफ्तारियां और जांच की प्रगति
मई 2026 में पांच आरोपियों को रूज़ एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया था, जिसके बाद उन्हें सात दिन की CBI हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद जांच में आगे बढ़ते हुए CBI ने रिटायर्ड प्रोफेसर समेत कई अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया, जिन्हें प्रश्न पत्र निर्माण प्रक्रिया में गोपनीय पहुंच होने का संदेह था। जांच एजेंसी ने महाराष्ट्र से लेकर राजस्थान, हरियाणा और केरल तक फैले नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
चार्जशीट के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया
बुधवार को विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बालीगा ने CBI की चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लेते हुए एजेंसी को तीन दिन के भीतर अनुपूरक दस्तावेज़ दाखिल करने का निर्देश दिया। आगे की प्रक्रिया में अदालत आरोप तय करेगी और आरोपियों को सुनवाई का मौका दिया जाएगा। इस बात पर जोर दिया जाना जरूरी है कि चार्जशीट दाखिल होने का अर्थ दोषसिद्धि नहीं होता; सभी आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक निर्दोष माना जाएगा।
परीक्षा सुधार के लिए सरकार के कदम
NEET पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। सरकार ने परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार हेतु नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स गठित की है। इसके साथ ही लोकसभा से सख्त एंटी-पेपर लीक बिल पास किया गया है, जिसमें दोषियों के लिए कड़ी सजा और फास्ट-ट्रैक ट्रायल का प्रावधान है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी पुलिस को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज न करने और नाबालिगों की रिहाई के निर्देश दिए हैं।
यह मामला महत्वपूर्ण क्यों है
NEET-UG भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसमें हर साल लाखों छात्र भाग लेते हैं। पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों से लाखों प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। CBI की यह चार्जशीट संकेत देती है कि जांच एजेंसियां इस तरह के संगठित अपराधों पर सख्त कार्रवाई कर रही हैं, हालांकि अंतिम न्याय के लिए अभी लंबी कानूनी प्रक्रिया बाकी है।
