केंद्र सरकार ने खुदरा मेडिकल स्टोरों पर प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री को CCTV निगरानी में लाने का मसौदा रखा है। नियम अभी अंतिम नहीं है और हितधारकों से आपत्तियां व सुझाव मांगे गए हैं।
मुख्य बातें
- स्वास्थ्य मंत्रालय ने Drugs Rules, 1945 के Rule 65 में नया प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव दिया है।
- मसौदे का उद्देश्य Schedule H, H1 और X दवाओं की बिना वैध पर्चे बिक्री और अनधिकृत पहुंच पर रोक मजबूत करना है।
- खुदरा बिक्री परिसर में CCTV प्रणाली लगाना और रिकॉर्डिंग तीन महीने तक सुरक्षित रखना प्रस्तावित है।
- यह अभी draft notification है; अंतिम नियम हितधारकों की प्रतिक्रिया और सरकारी समीक्षा के बाद ही बनेगा।
भारत में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री पर निगरानी कड़ी करने की दिशा में एक बड़ा नियामकीय प्रस्ताव सामने आया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने Draft Gazette Notification G.S.R. 791(E) के जरिए मेडिकल स्टोरों में CCTV surveillance अनिवार्य करने का मसौदा प्रकाशित किया है। प्रस्ताव का खास जोर Schedule H, H1 और X दवाओं की ऐसी बिक्री पर है जो पंजीकृत चिकित्सक के वैध प्रिस्क्रिप्शन के बिना होती है।
सरकार का कहना है कि CCTV व्यवस्था बिक्री प्रक्रिया की जांच योग्य रिकॉर्डिंग तैयार करेगी और दवाओं की सप्लाई चेन में जवाबदेही बढ़ाएगी। लेकिन पाठकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है। मसौदे पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, जिनकी समीक्षा के बाद अंतिम फैसला होगा।
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मसौदे में क्या बदलाव प्रस्तावित है?
Central Drugs Standard Control Organization की अधिसूचना सूची के अनुसार, 8 सितंबर 2026 की G.S.R. 791(E) Drugs Rules, 1945 में संशोधन का मसौदा है। इसमें Rule 65 के बाद एक नया उप-नियम जोड़ने का प्रस्ताव है। इसका आशय यह है कि थोक कारोबार को छोड़कर पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर दी जाने वाली दवा की आपूर्ति लाइसेंस प्राप्त परिसर में स्थापित और संचालित CCTV प्रणाली की निगरानी में की जाए।
स्वास्थ्य मंत्रालय की 17 सितंबर की आधिकारिक जानकारी में कहा गया कि यह कदम Schedule H, H1 और X दवाओं तक अनधिकृत पहुंच तथा उनकी बिना पर्चे बिक्री से जुड़ी चिंताओं को संबोधित करने के लिए सुझाया गया है। मंत्रालय के अनुसार इस विचार पर पहले Drugs Consultative Committee में चर्चा हुई और बाद में Drugs Technical Advisory Board ने इसे मंजूरी के लिए अनुशंसित किया।
मसौदे के विवरण के अनुसार रिकॉर्डिंग को तीन महीने तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे औषधि निरीक्षक या अन्य सक्षम प्राधिकरण जरूरत पड़ने पर किसी बिक्री की परिस्थितियों की जांच कर सकेंगे।
Schedule H, H1 और X दवाएं क्यों महत्वपूर्ण हैं?
इन अनुसूचियों में आने वाली दवाएं सामान्य over-the-counter उत्पादों जैसी नहीं मानी जातीं। Schedule H और H1 में कई ऐसी दवाएं शामिल होती हैं जिनका उपयोग चिकित्सकीय सलाह के बिना जोखिम पैदा कर सकता है। H1 श्रेणी में कुछ एंटीबायोटिक और अन्य नियंत्रित प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के लिए अतिरिक्त रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी होती है। Schedule X में ऐसे औषधीय पदार्थ शामिल हो सकते हैं जिनके दुरुपयोग या निर्भरता का जोखिम अधिक माना जाता है और जिनकी बिक्री पर कड़े नियंत्रण लागू होते हैं।
इसीलिए प्रस्ताव का सार्वजनिक-स्वास्थ्य पक्ष केवल निगरानी कैमरे तक सीमित नहीं है। सरकार का व्यापक लक्ष्य बिना पर्चे दवा खरीदने की आदत, एंटीबायोटिक के गलत उपयोग और नियंत्रित दवाओं की अनधिकृत बिक्री को कम करना है। हालांकि CCTV अपने आप प्रिस्क्रिप्शन की वैधता साबित नहीं करेगा; निरीक्षण, लाइसेंसिंग, डिजिटल रिकॉर्ड और उपभोक्ता जागरूकता भी उतनी ही जरूरी रहेंगी।
मरीजों और मेडिकल स्टोरों पर संभावित असर
यदि नियम अंतिम रूप में लागू होता है, तो मरीजों को प्रिस्क्रिप्शन वाली दवा लेते समय वैध डॉक्टर की पर्ची साथ रखनी होगी और दुकानों को बिक्री काउंटर की रिकॉर्डिंग व्यवस्था बनाए रखनी पड़ेगी। इसका उद्देश्य मरीज की निजता में दखल देना नहीं बल्कि नियंत्रित बिक्री का सत्यापन करना है। अंतिम नियम में कैमरे की स्थिति, रिकॉर्डिंग की सुरक्षा, अधिकृत पहुंच और डेटा के इस्तेमाल की सीमा स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।
मेडिकल स्टोर संगठनों ने लागत और अनुपालन का मुद्दा भी उठाया है। New Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार All India Organisation of Chemists and Druggists ने छोटे खुदरा विक्रेताओं पर कैमरा, DVR/NVR और रखरखाव का अतिरिक्त बोझ पड़ने की चिंता जताई है। यह आपत्ति मसौदा-परामर्श में महत्वपूर्ण होगी, खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों के स्टोरों के लिए।
क्या यह नियम अभी से लागू है?
नहीं। यह draft notification है। आधिकारिक मसौदे में कहा गया है कि Gazette की प्रतियां जनता को उपलब्ध होने के 30 दिन बाद प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आपत्तियां और सुझाव Under Secretary (Drugs), Ministry of Health and Family Welfare को भेजने का विकल्प दिया है। इसलिए किसी भी मेडिकल स्टोर या उपभोक्ता को अभी इसे लागू अंतिम नियम समझकर भ्रमित नहीं होना चाहिए।
आगे क्या होगा?
परामर्श अवधि के बाद मंत्रालय प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करेगा। सरकार मसौदे में बदलाव कर सकती है, अनुपालन के लिए समय दे सकती है या स्पष्टीकरण जारी कर सकती है। अंतिम अधिसूचना आने पर ही यह स्पष्ट होगा कि नियम किन सभी दवाओं, किस प्रकार के बिक्री परिसरों और किस तकनीकी मानक पर लागू होगा।
The Press of Asia इस प्रस्ताव की अंतिम अधिसूचना, लागू होने की तारीख और मेडिकल स्टोरों के लिए जारी संचालन दिशानिर्देशों पर नजर रखेगा। अन्य भारतीय नीतिगत खबरों के लिए हमारा India coverage देखें।
