अंबाला, 28 सितंबर: हरियाणा के अंबाला शहर के पास धूलकोट गांव में रविवार दोपहर एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढह गई, जिसमें कई मजदूरों की मौत हो गई। रविवार शाम तक प्रशासन ने चार मौतों की पुष्टि की थी, जबकि सोमवार सुबह की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या छह बताई गई है। NDRF और SDRF की टीमें मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटी हैं।
ताज़ा अपडेट (28 सितंबर, शाम): हादसे में मरने वालों की संख्या 6 हो गई है। द ट्रिब्यून के अनुसार:
- जिला प्रशासन ने 6 मौतों की पुष्टि की है और बचाव अभियान पूरा हो गया है। डिप्टी कमिश्नर सचिन गुप्ता ने सिविल अस्पताल में घायलों से मुलाकात की।
- मृतकों की पहचान राजिंदर कुमार (50, सोंटा गांव, अंबाला), कालिया राम (48, बाराबंकी, उत्तर प्रदेश), शास्त्री राम (50, बहराइच, उत्तर प्रदेश), रूप सिंह (55, डांगडेरा, पंजाब), मलकीत सिंह (पंजाब) और रामजी दास (अंबाला) के रूप में हुई है।
- इमारत कथित तौर पर बिना मंजूरी के बन रही थी। जिला प्रशासन जांच समिति गठित करेगा।
- मृतकों के परिजनों ने इमारत के मालिक के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है; रिपोर्ट के समय तक FIR दर्ज नहीं हुई थी।
स्रोत: The Tribune: Toll rises to 6 in Ambala building collapse, kin demand FIR against owner
मुख्य बातें
- कब और कहां: 27 सितंबर को करीब 3 बजे, धूलकोट गांव (अंबाला शहर)।
- मौतें: रविवार शाम तक 4 की पुष्टि; सोमवार सुबह की रिपोर्टों में संख्या 6।
- बचाव: 13 लोगों को मलबे से निकाला गया; रविवार को प्रशासन ने 15-20 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई थी।
- मौके पर मजदूर: हादसे के समय करीब 35-40 मजदूर काम कर रहे थे।
- कार्रवाई: ठेकेदार फरार बताया गया है; प्रशासन ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है।
कैसे हुआ हादसा
द ट्रिब्यून के अनुसार हादसे के वक्त इमारत की तीसरी मंजिल पर लिंटर (छत) डाला जा रहा था। मौके पर मौजूद एक मजदूर करमजीत ने खबरगांव को बताया कि पहली मंजिल पर प्लास्टर और दूसरी मंजिल पर ढलाई का काम चल रहा था, तभी तीसरी मंजिल की शटरिंग (सहारा ढांचा) गिर गई और देखते ही देखते इमारत का बड़ा हिस्सा ढह गया।
पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत ने बताया कि इमारत की ऊपरी, बीच की और पहली मंजिल आंशिक रूप से ढह गई और कई मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका है। इमारत को नगर निगम से मंजूरी मिली थी या नहीं, यह अभी साफ नहीं है।
मृतक और घायल
द ट्रिब्यून की रविवार की रिपोर्ट में जिन चार मृतकों की पहचान हुई, उनमें अंबाला के सोंटा गांव के राजिंदर कुमार (50), उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के कालिया राम (48), बहराइच के शास्त्री राम (50) और पंजाब के डांगडेरा के रूप सिंह (55) शामिल हैं। यानी मरने वालों में ज़्यादातर दूसरे राज्यों से आए प्रवासी मजदूर हैं।
अंबाला की सिविल सर्जन डॉ. रेणु बेरी ने बताया कि शाम को चार लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया। द प्रिंट (हिंदी) के अनुसार 12 मजदूर घायल हुए, जिनमें से 7 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। SDM दर्शन कुमार ने हादसे को बेहद दुखद बताया।
बचाव अभियान
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने मलबा हटाना शुरू किया। बाद में NDRF, SDRF, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और रात भर बचाव कार्य चला। रिपब्लिक भारत की सोमवार सुबह की रिपोर्ट के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है और कुछ मजदूर अब भी मलबे में फंसे हो सकते हैं। आधिकारिक आंकड़ा आने पर यह खबर अपडेट की जाएगी।
बड़ा सवाल: निर्माण स्थलों पर सुरक्षा
यह हादसा एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा की अनदेखी की ओर इशारा करता है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक एक साथ कई मंजिलों पर काम चल रहा था और ऊपर लिंटर डालते समय शटरिंग गिर गई। ऐसे हादसे अक्सर इन कारणों से होते हैं:
- शटरिंग और सहारे (सपोर्ट) का कमज़ोर या गलत तरीके से लगाया जाना।
- नीचे की मंजिलों पर मसाला पूरी तरह मज़बूत होने से पहले ऊपर का भार डालना।
- बिना मंजूर नक्शे और इंजीनियर की निगरानी के निर्माण।
- मजदूरों के लिए हेलमेट, सुरक्षा बेल्ट और बीमा जैसी सुविधाओं की कमी।
जांच में यह साफ होना चाहिए कि इमारत का नक्शा मंजूर था या नहीं, निर्माण किसकी निगरानी में हो रहा था और ठेकेदार व मालिक की ज़िम्मेदारी क्या है। मारे गए मजदूरों के परिवारों को मुआवजा और घायलों का मुफ्त इलाज भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
इसी महीने गुजरात के गांधीनगर में भी एक निर्माणाधीन इमारत का स्लैब गिरा था, हालांकि वहां सभी 15 मजदूरों को बचा लिया गया था (पढ़ें)। उत्तर प्रदेश के कौशांबी में पटाखा फैक्टरी विस्फोट ने भी कार्यस्थल सुरक्षा पर ऐसे ही सवाल खड़े किए थे (पढ़ें)।





