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दिल्ली दंगा साजिश केस: उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत पर आज दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई; जानिए अब तक क्या हुआ

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30 सितंबर: 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित “बड़ी साजिश” के मामले में जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर आज दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है। दोनों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत मुकदमा चल रहा है। उमर खालिद करीब छह साल से जेल में हैं, और मामले में अब तक ट्रायल शुरू नहीं हुआ है।

मुख्य बातें

  • कौन सी अदालत: दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट हैं।
  • किस पर सुनवाई: निचली अदालत ने 4 जुलाई को दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उस फैसले के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम की धारा 21 के तहत दायर अपीलों पर आज सुनवाई है।
  • पिछली बार क्यों टली: 21 सितंबर को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू के बीमार होने के कारण विशेष लोक अभियोजक ने समय मांगा था, इसलिए सुनवाई 30 सितंबर तक टल गई।
  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने खालिद और इमाम को जमानत देने से इनकार किया था, जबकि कुछ अन्य सह-आरोपियों को जमानत मिल गई थी।
  • शरजील को अंतरिम राहत: निचली अदालत ने शरजील इमाम को चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए 4 से 10 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी है।

आज किस बात पर सुनवाई है

द क्विंट और एएनआई के अनुसार, कड़कड़डूमा की निचली अदालत ने 4 जुलाई 2026 को दोनों की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के फैसले का हवाला दिया था। इसी आदेश के खिलाफ दोनों ने NIA अधिनियम की धारा 21 के तहत हाई कोर्ट में अपील दायर की है। 21 सितंबर की सुनवाई में विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने बताया था कि मुख्य वकील, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू, स्वास्थ्य कारणों से उपलब्ध नहीं हैं, जिसके बाद अदालत ने मामला 30 सितंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में क्या कहा था

एएनआई के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को गुलफिशा फातिमा बनाम राज्य मामले में फैसला दिया था। कोर्ट ने खालिद और इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, लेकिन उन्हें यह छूट दी कि संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद, या 5 जनवरी 2026 से एक साल बाद, जो भी पहले हो, वे दोबारा जमानत की मांग कर सकते हैं। भारत एक्सप्रेस के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की भूमिका को बाकी सह-आरोपियों से “गुणात्मक रूप से अलग” बताया था।

दोनों पक्ष क्या कह रहे हैं

भारत एक्सप्रेस के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने विस्तृत जवाबी हलफनामे दाखिल कर जमानत का कड़ा विरोध किया है और दोनों को दंगों का “मास्टरमाइंड” बताया है। बचाव पक्ष ने अपनी दलीलों में सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य फैसले, सैयद इफ्तिखार अंद्राबी बनाम NIA, का हवाला दिया है। दोनों आरोपी खुद पर लगे आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत पाना आसान नहीं होता। अगर अदालत को पहली नज़र में लगे कि आरोप सही होने के उचित आधार हैं, तो जमानत नहीं दी जा सकती। इसीलिए ऐसे मामलों में आरोपी अक्सर लंबे समय तक जेल में रहते हैं।

मामला क्या है

यह मामला दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की FIR 59/2020 से जुड़ा है। इसमें UAPA, भारतीय दंड संहिता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाव कानून की धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस का आरोप है कि फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थे। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। द क्विंट के अनुसार मामले में ट्रायल अभी शुरू नहीं हुआ है।

दिप्रिंट के अनुसार, उमर खालिद को इस मामले में 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। शरजील इमाम जनवरी 2020 से एक अन्य मामले में हिरासत में हैं, और इस साजिश मामले में उनकी गिरफ्तारी 25 अगस्त 2020 को दर्ज हुई थी। आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और खालिद सैफी समेत कई अन्य लोग भी इस मामले में आरोपी हैं।

शरजील इमाम को शादी के लिए अंतरिम जमानत

न्यूज़ग्राम के अनुसार, कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने 22 सितंबर को शरजील इमाम को अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए 4 से 10 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी। यह राहत सिर्फ इसी अवधि के लिए है और इसका नियमित जमानत पर होने वाली सुनवाई से कोई लेना-देना नहीं है।

आगे क्या

आज की सुनवाई में हाई कोर्ट या तो दलीलें सुनना शुरू करेगा या आगे की तारीख देगा। अदालत में आज क्या हुआ, इसकी पूरी जानकारी हम शाम को अलग खबर में देंगे।

स्रोत / संदर्भ

प्रस्तुति
हिंदी डेस्क

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