मुंबई, 27 सितंबर: महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार, 26 सितंबर को राज्य के 358 में से 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया। यानी राज्य का करीब 74 प्रतिशत हिस्सा इस साल कमजोर मानसून की चपेट में है। सरकारी आदेश (GR) के साथ किसानों के लिए जमीन राजस्व में छूट, फसल कर्ज के पुनर्गठन और बिजली बिल में राहत जैसे कदमों की घोषणा की गई है, लेकिन फसल नुकसान का सीधा मुआवजा अभी तय नहीं हुआ है।
मुख्य बातें
- 265 तालुके, 32 जिले: राज्य के 358 में से 265 तालुके सूखाग्रस्त घोषित।
- 18.8% कम बारिश: 1 जून से 18 सितंबर तक 755.9 मिमी बारिश हुई, जबकि औसत 932.3 मिमी है।
- सबसे ज्यादा असर: छत्रपति संभाजीनगर (मराठवाड़ा) विभाग के 74 और अमरावती विभाग के 56 तालुके।
- तुरंत राहत: जमीन राजस्व में छूट, फसल कर्ज का पुनर्गठन, कर्ज वसूली पर रोक, कृषि पंप के बिजली बिल में छूट, छात्रों की परीक्षा फीस माफ।
- मुआवजा बाद में: फसल नुकसान की सहायता पर फैसला सर्वे पूरा होने के बाद अलग आदेश से होगा।
किन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर
ThePrint की रिपोर्ट के अनुसार विभागवार आंकड़े इस तरह हैं: छत्रपति संभाजीनगर विभाग के 74, अमरावती के 56, नासिक के 49, नागपुर के 39 और पुणे विभाग के 35 तालुके सूखाग्रस्त घोषित हुए हैं। बाकी 12 तालुके कोंकण क्षेत्र के हैं। यानी मराठवाड़ा और विदर्भ, जो पहले से ही बारिश पर निर्भर खेती और किसानों की आर्थिक तंगी के लिए जाने जाते हैं, इस बार भी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
जिलों के स्तर पर नेशनल हेराल्ड के मुताबिक यवतमाल के 16 और जलगांव के 15 तालुके सूची में हैं, जबकि अहिल्यानगर, नागपुर, अमरावती और नांदेड़ के 14-14 तालुके सूखाग्रस्त घोषित किए गए हैं।
सूखा किस आधार पर घोषित हुआ
राज्य ने यह फैसला 2016 की सूखा प्रबंधन संहिता (Drought Management Manual) के मानकों के आधार पर लिया है। रिपोर्टों के अनुसार इसमें एक अहम कसौटी यह रही कि जून से अब तक किसी इलाके में लगातार कम से कम 21 दिन तक बारिश न होना। 1 जून से 18 सितंबर के बीच राज्य में औसत 932.3 मिमी की जगह 755.9 मिमी बारिश हुई, जो करीब 18.8 प्रतिशत की कमी है।
AFP की रिपोर्ट के अनुसार इस साल का कमजोर मानसून सामान्य से ज्यादा ताकतवर El Niño से जुड़ा माना जा रहा है, जो दक्षिण एशिया में आम तौर पर सूखे हालात लाता है। पड़ोसी कर्नाटक ने भी किसानों के लिए सूखा सहायता की घोषणा की है। देश के स्तर पर भी मानसून कमजोर रहा है; मौसम विभाग ने सितंबर में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान दिया था (IMD का सितंबर अनुमान यहां पढ़ें)।
किसानों को अभी क्या राहत मिलेगी
सरकारी आदेश के साथ जिन राहत उपायों का ऐलान हुआ है, वे इस प्रकार हैं:
- जमीन राजस्व (लगान) में छूट
- फसल कर्ज का पुनर्गठन और कृषि कर्ज की वसूली पर फिलहाल रोक
- कृषि पंपों के बिजली बिल में छूट और बिल बकाया होने पर पंप कनेक्शन न काटने का निर्देश
- स्कूल-कॉलेज के छात्रों की परीक्षा फीस माफ
- पीने के पानी के लिए टैंकर, अनाज और पशुओं के चारे की व्यवस्था
- ग्रामीण रोजगार योजना (रोजगार गारंटी) के नियमों में ढील
राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि किसानों की आंखों के सामने खड़ी फसलें सूखते देखना बेहद दर्दनाक है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और नुकसान का आकलन कर समय पर मदद दी जाएगी। फडणवीस ने 22 सितंबर को इस मुद्दे पर कैबिनेट की एक उप-समिति भी बनाई थी।
मुआवजा कब और कैसे
सबसे बड़ा सवाल फसल नुकसान के मुआवजे का है। नेशनल हेराल्ड के अनुसार उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने कहा है कि फसल नुकसान की सहायता की घोषणा जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अलग आदेश से की जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारियों को फसल नुकसान का सर्वे करने को कहा गया है, जिसमें खेतों की तस्वीरें और GPS लोकेशन दर्ज करना जरूरी होगा।
किसान नेता अजीत नवले का कहना है कि असली सवाल मुआवजे का है। यह चिंता जायज़ है, क्योंकि लगान माफी और कर्ज पुनर्गठन से किसान को तुरंत नकद राहत नहीं मिलती; बुवाई पर हुआ खर्च और खराब हुई फसल की भरपाई सीधी सहायता से ही होती है।
सूखा घोषणा का असल मतलब क्या है
सूखा घोषित होने से प्रशासन के लिए राहत के कई रास्ते खुल जाते हैं: कर्ज वसूली रुकती है, पानी और चारे की व्यवस्था के लिए फंड का इस्तेमाल आसान होता है और राज्य आम तौर पर केंद्र से अतिरिक्त सहायता मांग सकता है। लेकिन इसका फायदा इस पर निर्भर करता है कि सर्वे कितनी जल्दी और कितनी ईमानदारी से पूरा होता है। GPS और फोटो वाला सर्वे पारदर्शिता बढ़ा सकता है, पर इसमें समय भी ज्यादा लगता है।
असर सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं रहेगा। महाराष्ट्र कपास, सोयाबीन, गन्ना और दालों का बड़ा उत्पादक है। इन फसलों की पैदावार घटी तो आगे चलकर खाद्य तेल, चीनी और दालों की कीमतों पर दबाव बन सकता है। सरकार ने हाल ही में खाद्य तेल पर आयात शुल्क घटाया है (पूरी खबर), जिससे कुछ राहत मिल सकती है।
यह भी गौर करने लायक है कि देश में एक ही समय पर दो उलटी तस्वीरें दिख रही हैं: महाराष्ट्र में सूखा है, जबकि नेपाल में भारी बारिश से बिहार में बाढ़ का खतरा बना हुआ है (बिहार बाढ़ अलर्ट)। यह असमान बारिश जलवायु बदलाव के दौर में जल प्रबंधन की चुनौती को और साफ करती है।
आगे क्या देखना होगा
- फसल नुकसान सर्वे कब तक पूरा होता है और मुआवजे की दर क्या तय होती है।
- क्या राज्य केंद्र से अतिरिक्त सहायता के लिए ज्ञापन भेजता है।
- रबी की बुवाई के लिए जलाशयों में पानी और बीज की उपलब्धता।
- मराठवाड़ा-विदर्भ में पीने के पानी के टैंकरों की मांग कितनी बढ़ती है।





