नई दिल्ली, 26 सितंबर: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष का विरोध शनिवार को और तेज़ हो गया। कांग्रेस ने दिल्ली, बेंगलुरु और देहरादून समेत कई जगहों पर प्रदर्शन किए, जबकि चुनाव आयोग ने नई दिल्ली के निर्वाचन सदन में बैठक के बाद प्रेस नोट जारी कर कहा कि SIR का आदेश पूरे आयोग की सर्वसम्मति से जारी हुआ था।
आगे की खबर (3 अक्टूबर): गांधी जयंती पर दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शन हुए और दिल्ली में सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए। पूरी खबर: CEC के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन, CJP ने दी 10 अक्टूबर की समय-सीमा
मुख्य बातें
- विवाद 23 सितंबर की इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट से शुरू हुआ, जिसके मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार CEC के फैसलों पर लिखित आपत्ति दर्ज की।
- चुनाव आयोग का कहना है कि अलग-अलग राय “निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा” है और सभी आदेश कानून के तहत जारी हुए।
- 26 सितंबर को आयोग ने दोहराया कि 24 जून 2025 का SIR आदेश “आयोग की सर्वसम्मति” से जारी हुआ था।
- विपक्षी दल CEC को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में नया नोटिस देने की तैयारी में हैं; अप्रैल में 73 सांसदों का नोटिस पहले से राज्यसभा में लंबित है।
- BJP ने आरोपों को संस्थाओं पर हमला बताया है।
विवाद की जड़: आयोग के भीतर असहमति
इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार उन फैसलों पर आपत्ति जताई जो, उनके मुताबिक, उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए। आपत्तियां मतदाता पंजीकरण के फॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता सूची में संशोधन और केंद्रीकृत डेटाबेस पर नियंत्रण जैसे विषयों से जुड़ी थीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों आयुक्तों ने मतदाता डेटा प्रणालियों पर निगरानी को लेकर कैबिनेट सचिव को भी पत्र लिखा था।
तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में फैसले आमतौर पर सहमति से होते हैं; असहमति की स्थिति में बहुमत का फैसला माना जाता है। इसलिए दो आयुक्तों की बार-बार आपत्ति की खबर ने यह सवाल खड़ा किया कि बड़े फैसले किस प्रक्रिया से लिए गए।
चुनाव आयोग का पक्ष
रिपोर्ट आने के दिन ही आयोग ने बयान जारी कर कहा कि लिखित नोट, टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव संस्थागत विचार-विमर्श का “सामान्य हिस्सा” हैं, सभी आदेशों को कानूनी मंज़ूरी थी और तय प्रक्रिया का पालन हुआ। आयोग ने यह भी कहा कि पिछले एक साल में करीब 40 पहल और सुधार पूरे आयोग ने सर्वसम्मति से मंज़ूर किए।
शनिवार, 26 सितंबर को निर्वाचन सदन में CEC और दोनों आयुक्तों की बैठक के बाद जारी प्रेस नोट में नए मतदाताओं के पंजीकरण और SIR की तारीखें बढ़ाने पर बात की गई, और स्पष्ट किया गया कि सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए SIR का 24.6.2025 का आदेश आयोग की सर्वसम्मति से जारी हुआ था।
सड़कों पर विपक्ष
- दिल्ली (25 सितंबर): युवा कांग्रेस और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च की कोशिश की, लेकिन उन्हें पार्टी दफ्तरों के पास रोक दिया गया। NSUI ने भी प्रदर्शन किया।
- बेंगलुरु: फ्रीडम पार्क में कर्नाटक कांग्रेस के नेताओं ने धरना दिया और राष्ट्रपति से CEC को हटाने की मांग की। डी.के. शिवकुमार ने आरोप लगाया कि योग्य मतदाताओं के नाम काटे गए। कर्नाटक में SIR के दौरान लाखों मतदाताओं को नोटिस और नाम हटाने के आंकड़ों को कांग्रेस ने मुद्दा बनाया।
- देहरादून (26 सितंबर): उत्तराखंड कांग्रेस ने सचिवालय तक मार्च किया, CEC का पुतला जलाया और राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। हरीश रावत, यशपाल आर्य, गणेश गोदियाल और कुमारी सैलजा मौजूद रहे।
लोकसभा में कांग्रेस के गौरव गोगोई ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। TMC के अभिषेक बनर्जी, और DMK, RJD व सपा के नेताओं ने भी CEC को हटाने और SIR रोकने की मांग की है।
इसी बीच नए राजनीतिक समूह “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) ने CEC को इस्तीफे के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था और मांग पूरी न होने पर जंतर-मंतर से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। CJP ने 2 अक्टूबर से देशभर में प्रदर्शन शुरू करने की बात कही है।
BJP का जवाब
BJP सांसद संबित पात्रा ने कहा कि आयोग के भीतर का पत्राचार “आधिकारिक विचार-विमर्श” है, जो स्वस्थ लोकतंत्र का संकेत है। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहा है।
CEC को हटाना कितना आसान?
मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जो सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए तय है — यानी संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के ज़रिए, सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता के आधार पर। मौजूदा संसदीय गणित में सिर्फ विपक्ष के दम पर यह प्रस्ताव पास होना मुश्किल है। अप्रैल में राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने CEC के खिलाफ महाभियोग जैसे नोटिस खारिज कर दिए थे, और 73 सांसदों वाला एक नोटिस अब भी राज्यसभा में लंबित बताया जाता है।
आम मतदाता के लिए इसका मतलब
यह विवाद उस समय है जब कई राज्यों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चल रहा है। मतदाताओं के लिए सबसे ज़रूरी है कि वे अपना नाम ड्राफ्ट सूची में जांच लें और ज़रूरत हो तो समय पर फॉर्म 6 (नया नाम) या दावा-आपत्ति दाखिल करें। दिल्ली में SIR की प्रक्रिया पर हमारी रिपोर्ट यहां पढ़ें: Delhi SIR 2026: ड्राफ्ट सूची में नाम कैसे जांचें।
आगे क्या
- विपक्ष अगले सप्ताह संसद के दोनों सदनों में CEC को हटाने का नया नोटिस दे सकता है।
- CJP ने 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है।
- चुनाव आयोग ने SIR की तारीखें बढ़ाने पर फैसला लिया है; राज्यवार नई तारीखें आयोग की अधिसूचना से साफ होंगी।
स्रोत / संदर्भ
- The Week: “Pressure mounts on CEC Gyanesh Kumar; Opposition plans removal motion, CJP threatens nationwide protest” (24 सितंबर 2026)
- The Week: “Congress protests against CEC Gyanesh Kumar as SIR process continues in Karnataka” (26 सितंबर 2026)
- ETV Bharat: Election Commission dissent report — live updates (ECI का बयान, विपक्ष और BJP की प्रतिक्रिया)
- NewsBytes: ECI statement after commission meeting at Nirvachan Sadan (26 सितंबर 2026)
- Newslaundry: दिल्ली में कांग्रेस का प्रदर्शन (25 सितंबर 2026)
- The NewsMill: उत्तराखंड कांग्रेस का प्रदर्शन (26 सितंबर 2026)





