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CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर गांधी जयंती को प्रदर्शन: दिल्ली में सैकड़ों हिरासत में, मुंबई में CJP का “जेल भरो”; 10 अक्टूबर की समय-सीमा

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3 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर गांधी जयंती के दिन दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शन हुए। दिल्ली में जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी भी शामिल थीं। मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने “जेल भरो आंदोलन” किया। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा है कि अगर 10 अक्टूबर तक इस्तीफा नहीं हुआ तो दिल्ली में फिर प्रदर्शन होगा। चुनाव आयोग मतदाता सूची से जुड़े आरोपों को पहले ही खारिज कर चुका है।

मुख्य बातें

  • दिल्ली: आउटलुक के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने दोपहर तक 600 से ज्यादा लोगों के हिरासत में लिए जाने की बात कही, जबकि पुलिस अधिकारियों ने बाद में यह संख्या करीब 700 बताई।
  • पाबंदियां: जंतर-मंतर के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू थी। कई मेट्रो स्टेशन बंद रहे।
  • मुंबई: पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग जुटे।
  • समय-सीमा: टाइम्स नाउ हिंदी के अनुसार दिपके ने 10 अक्टूबर को “जंतर-मंतर 2.0” का एलान किया है।
  • आयोग का पक्ष: चुनाव आयोग का कहना है कि SIR समेत सभी फैसले तीनों आयुक्तों ने सर्वसम्मति से लिए।

दिल्ली में क्या हुआ

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। धारा 163 के तहत पांच या उससे ज्यादा लोगों के जुटने, जुलूस और धरने पर रोक थी। आउटलुक की रिपोर्टर के मुताबिक दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और सीआरपीएफ के जवानों ने रास्ते घेर रखे थे और हिरासत में लिए गए लोगों को ले जाने के लिए बसें खड़ी थीं। एक पुलिस अधिकारी ने पत्रिका से कहा कि प्रदर्शनकारियों के पास अनुमति नहीं है और 1,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।

अल जज़ीरा ने दोपहर 3 बजे तक 500 से ज्यादा लोगों के पकड़े जाने की बात लिखी। द क्विंट के अनुसार हिरासत में लिए गए लोगों में पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, आम आदमी पार्टी के सौरभ भारद्वाज, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, राजद सांसद मनोज झा और छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा शामिल थे। आउटलुक ने आप सांसद संजय सिंह का नाम भी लिखा है। प्रदर्शन में आइसा, एसएफआई और एनएसयूआई जैसे छात्र संगठन, नागरिक संगठन और आप तथा कांग्रेस के कार्यकर्ता शामिल थे।

जंतर-मंतर के आसपास के मेट्रो स्टेशन बंद रहे। अल जज़ीरा ने इनकी संख्या कम से कम 11 और द क्विंट ने 12 बताई है। आउटलुक के अनुसार इलाके में कई घंटे इंटरनेट सेवा भी बंद रही। उपलब्ध रिपोर्टों में यह साफ नहीं है कि हिरासत में लिए गए लोगों को कब छोड़ा गया।

मुंबई में CJP का “जेल भरो आंदोलन”

फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार मुंबई पुलिस ने 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के एक आदेश और शिवाजी पार्क के साइलेंस ज़ोन होने का हवाला देकर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद CJP ने इसे “जेल भरो आंदोलन” का रूप दिया। पार्क के बाहर बैरिकेड लगाए गए और भारी पुलिस बल तैनात रहा।

टाइम्स नाउ हिंदी के अनुसार प्रदर्शन में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और शबाना आज़मी, गायक विशाल ददलानी, महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी और शिवसेना (यूबीटी) तथा मनसे के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शन से पहले दिपके को मरीन ड्राइव पर कुछ देर के लिए हिरासत में लिया गया था और बाद में छोड़ दिया गया।

दिपके ने कहा कि CEC के पास 10 अक्टूबर तक का समय है। उनके मुताबिक उस दिन देशभर से समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे और अगर पुलिस ने जंतर-मंतर जाने से रोका तो “वहीं प्रदर्शन किया जाएगा।” अल जज़ीरा के अनुसार CJP के सौरव दास ने कहा कि आंदोलन तभी खत्म होगा जब ज्ञानेश कुमार इस्तीफा देंगे।

प्रदर्शनकारियों की मांगें

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और उनके खिलाफ आपराधिक मामला।
  • मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों की जांच और प्रक्रिया पर रोक।
  • चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को वापस लेना और नियुक्ति की पारदर्शी प्रक्रिया।

विवाद की जड़ क्या है

बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार आरोप यह है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार इस बात पर आपत्ति दर्ज की कि कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए, खासकर SIR से जुड़े फैसले। आलोचकों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में लाखों पात्र मतदाताओं के नाम हटे। ये आरोप हैं और चुनाव आयोग इन्हें नहीं मानता।

चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि तीन सदस्यीय आयोग ने SIR समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए। आयोग के इस जवाब की खबर हमने 26 सितंबर को दी थी।

आगे क्या

  • 4 अक्टूबर: बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार मुंबई में मनसे और शिवसेना (यूबीटी) का मोर्चा।
  • 6 अक्टूबर: अल जज़ीरा के अनुसार कांग्रेस ने मंगलवार को CEC के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन का एलान किया है।
  • 10 अक्टूबर: CJP का दिल्ली कूच, अगर तब तक इस्तीफा नहीं होता।
  • अन्य राज्य: CJP ने गोवा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में भी प्रदर्शन की बात कही है।

स्रोत / संदर्भ

प्रस्तुति
हिंदी डेस्क

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