नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) के तहत अनिवार्य coverage के लिए मासिक wage ceiling को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया है। यह संशोधित सीमा 17 सितंबर 2026 से लागू है। सरकार का अनुमान है कि इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी provident fund, pension और insurance के वैधानिक दायरे में आ सकते हैं।
यह बदलाव खास तौर पर उन नए कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी EPF के लिए मानी जाने वाली मासिक wage ₹15,000 से अधिक लेकिन ₹25,000 तक है। पुरानी सीमा में ऐसे कर्मचारी नौकरी शुरू करते समय स्वतः mandatory EPF coverage से बाहर रह सकते थे। नई सीमा के बाद पात्र कर्मचारियों को लागू नियमों के अनुसार EPF savings, Employees’ Pension Scheme (EPS) और Employees’ Deposit Linked Insurance (EDLI) का लाभ मिलेगा।
क्या बदला है?
सरकार ने coverage threshold को एक दशक से अधिक समय बाद संशोधित किया है। ₹15,000 की पिछली सीमा सितंबर 2014 से लागू थी। अब ₹25,000 तक की wage वाले पात्र कर्मचारियों को mandatory social-security framework में शामिल किया जाएगा। यहां “wage ceiling” का अर्थ पूरी gross salary से हमेशा समान नहीं होता; contribution के लिए लागू wage components और किसी कर्मचारी की सदस्यता की स्थिति payroll records तथा EPFO नियमों पर निर्भर करती है।
इसलिए केवल salary package देखकर deduction का अंतिम आंकड़ा मान लेना ठीक नहीं होगा। कर्मचारी को अपनी payslip, Universal Account Number (UAN), employer की payroll communication और EPFO passbook देखनी चाहिए। पुराने सदस्य, exempted establishments या wage ceiling से ऊपर contribution करने वाले मामलों में अलग नियम लागू हो सकते हैं।
कर्मचारी के PF और take-home पर असर
नई सीमा का सबसे सीधा प्रभाव यह है कि पहले बाहर रहे wage band के कर्मचारी अब retirement corpus बनाना शुरू कर सकते हैं। सामान्य व्यवस्था में कर्मचारी और नियोक्ता निर्धारित दर से योगदान करते हैं। नियोक्ता के हिस्से का एक भाग पात्र मामलों में EPS में जाता है और शेष EPF account में जमा होता है। सटीक deduction कर्मचारी की लागू wage, membership और establishment के payroll setup पर निर्भर करेगा।
कुछ कर्मचारियों की monthly take-home pay घट सकती है, क्योंकि salary का हिस्सा अब provident fund में जाएगा। मगर वही रकम employer contribution और ब्याज के साथ दीर्घकालीन retirement savings का आधार बनेगी। इसे केवल वेतन कटौती नहीं, बल्कि forced social-security saving के रूप में समझना चाहिए। किसी भी discrepancy पर employee को HR से लिखित breakup मांगना चाहिए और EPFO portal पर जमा contribution मिलाना चाहिए।
नियोक्ताओं को क्या करना होगा?
EPFO के क्षेत्रीय कार्यालयों ने establishments को payroll और compliance systems अपडेट करने, नए पात्र कर्मचारियों का enrolment करने, समय पर Electronic Challan-cum-Return दाखिल करने और Aadhaar-KYC records seed करने की सलाह दी है। 17 सितंबर से लागू परिवर्तन के कारण सितंबर payroll और उसके बाद की filings में विशेष सावधानी जरूरी होगी।
सरकार ने रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत पात्र employers के लिए प्रति माह ₹3,000 तक incentive की बात भी कही है। उपलब्ध अवधि non-manufacturing establishments के लिए दो वर्ष और manufacturing units के लिए चार वर्ष तक हो सकती है, लेकिन claim eligibility संबंधित scheme conditions और सही ECR filing पर निर्भर करेगी।
51 लाख से अधिक नए कर्मचारियों को coverage
श्रम मंत्रालय के अनुसार संशोधन से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी mandatory coverage में आ सकते हैं। सरकार का अनुमान है कि इस विस्तार से annual public outgo लगभग ₹11,339 करोड़ होगा, जबकि मौजूदा budgetary support करीब ₹10,250 करोड़ है। व्यापक coverage formal employment में social-security gap को कम कर सकती है, खासकर छोटे शहरों, services और entry-level jobs में।
यह फैसला उस समय आया है जब भारत में formal employment और wage levels धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। आंध्र प्रदेश के हालिया निवेश प्रस्ताव जैसी योजनाएँ रोजगार सृजन पर जोर दे रही हैं, जबकि भारत–न्यूज़ीलैंड FTA exporters और manufacturing employment के लिए नए अवसर खोल सकता है। नई EPFO सीमा का महत्व इसीलिए बढ़ता है: रोजगार विस्तार के साथ social-security coverage भी बढ़ाना जरूरी है।
कर्मचारी अभी क्या करें?
- सितंबर और अक्टूबर की payslip में PF wage और deduction देखें।
- UAN सक्रिय रखें और Aadhaar, PAN तथा bank KYC जांचें।
- EPFO passbook में employer deposit समय पर आया या नहीं, मिलान करें।
- नई deduction या membership पर HR से लिखित clarification लें।
- अनजान संदेश या एजेंट को UAN password, OTP या bank details न दें।
नई सीमा लागू है, लेकिन हर कर्मचारी का payroll परिणाम समान नहीं होगा। आधिकारिक notification, EPFO records और employer communication ही अंतिम आधार होने चाहिए।





