नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 सितंबर को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-III योजना मंजूर की। आधिकारिक विवरण के अनुसार, इसका उद्देश्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के भीतर बिजली पारेषण नेटवर्क मजबूत करके 135 गीगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी संभव बनाना है।
बैटरी भंडारण क्यों शामिल है?
योजना में 50 गीगावाट-घंटे बैटरी ऊर्जा भंडारण का प्रावधान है। सरकार के अनुसार, इससे नवीकरणीय बिजली की अस्थिर उपलब्धता, नेटवर्क में भीड़ और सौर उत्पादन के बाहर के घंटों की मांग संभालने में सहायता मिलेगी।
लागत और समयसीमा
सरकार ने कुल परिव्यय ₹1,86,405 करोड़ और केंद्रीय वित्तीय सहायता ₹54,082 करोड़ बताई है। लक्ष्य वित्त वर्ष 2032–33 तक योजना स्थापित करना है। ये स्वीकृत योजना के आंकड़े हैं, पूरी हो चुकी क्षमता के नहीं।
उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने?
सरकार का कहना है कि सहायता पारेषण शुल्क का बोझ कम करने में मदद करेगी। हालांकि बयान से किसी घर के बिल में तत्काल या निश्चित कटौती का निष्कर्ष नहीं निकलता। परियोजनाओं का क्रियान्वयन और संबंधित शुल्क व्यवस्था महत्वपूर्ण होंगे।
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स्रोत
प्रधानमंत्री कार्यालय का कैबिनेट निर्णय विवरण, 30 सितंबर 2026।





