नई दिल्ली, 27 सितंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड में जनगणना, आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति, पोषण माह और युवाओं के नशा-विरोधी अभियान जैसे विषयों पर बात की। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल पूरे होने से ठीक पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत आतंकवाद के खिलाफ “जीरो-टॉलरेंस” नीति पर चल रहा है।
मुख्य बातें
- जनगणना: पहले चरण में 32 करोड़ परिवारों की जानकारी दर्ज हो चुकी है, 2.6 करोड़ लोगों ने खुद ऑनलाइन गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) की।
- आतंकवाद पर संदेश: 28-29 सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक को याद किया; बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र।
- पोषण माह: छत्तीसगढ़ के “हर घर मुनगा” अभियान और गुजरात की मोटे अनाज की व्यंजन प्रतियोगिता जैसी पहलों की सराहना।
- नशा-मुक्त युवा: लाखों युवाओं के नशे के खिलाफ संकल्प की तारीफ और रचनात्मक तरीकों से अभियान से जुड़ने की अपील।
जनगणना को बताया “सामूहिक राष्ट्रीय कर्तव्य”
प्रधानमंत्री ने इस बार का बड़ा हिस्सा जनगणना को दिया। IANS के अनुसार उन्होंने बताया कि पहले चरण में अब तक 32 करोड़ परिवारों की जानकारी दर्ज की जा चुकी है, और 2.6 करोड़ लोगों ने मोबाइल या इंटरनेट के जरिये खुद अपनी जानकारी भरी है। उन्होंने जनगणना में भागीदारी को “सामूहिक राष्ट्रीय कर्तव्य” बताया और कहा कि इससे मिलने वाले भरोसेमंद आंकड़े योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों की बेहतर प्लानिंग में मदद करते हैं।
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के चमोली जिले के माणा गांव की 83 वर्षीय पूर्णिमा रावत का उदाहरण दिया, जिनसे वहां गणना की शुरुआत हुई। उन्होंने उत्तरकाशी के भगोरी गांव में होमस्टे चलाने वाले हरदेव सिंह राणा का भी जिक्र किया, जिन्होंने खुद डिजिटल तरीके से अपना पंजीकरण किया। प्रधानमंत्री ने लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के बर्फीले और दूरदराज़ इलाकों में काम कर रहे गणनाकर्मियों की मेहनत की भी सराहना की।
आपके काम की बात: रिपोर्टों के अनुसार सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल (ec.census.gov.in) हिंदी समेत 16 भाषाओं में उपलब्ध है। इसमें करीब 15-20 मिनट लगते हैं, कोई दस्तावेज़ अपलोड नहीं करना होता, और जमा करने पर एक यूनिक ID मिलती है। यह ID गणनाकर्मी के आने पर काम आती है। जनगणना के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल या लिंक पर OTP या बैंक जानकारी साझा न करें।
सर्जिकल स्ट्राइक के 10 साल: “अब जीरो-टॉलरेंस”
28-29 सितंबर 2016 को नियंत्रण रेखा (LoC) के पार आतंकी ठिकानों पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक की 10वीं वर्षगांठ से पहले प्रधानमंत्री ने इसे याद किया। IANS के अनुसार उन्होंने कहा, “पहले हर आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर कार्रवाई की मांग होती थी… समय बीतने का इंतजार किया जाता था।” उन्होंने कहा, “अब आज का भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी लेकर चल रहा है।”
प्रधानमंत्री ने 13 सितंबर 2008 के दिल्ली सीरियल ब्लास्ट और 26/11 मुंबई हमलों का जिक्र करते हुए उस दौर को याद किया, और फिर सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर को भारत की बदली हुई रणनीति के उदाहरण के तौर पर गिनाया। ETV भारत की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक को एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता बताया।
यह संदेश ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान को आतंकवाद पर घेरा था (जयशंकर के UN भाषण की पूरी रिपोर्ट)। भारत ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के कश्मीर वाले बयान का भी UN में कड़ा जवाब दिया था (पढ़ें)।
पोषण माह: मुनगा से मोटे अनाज तक
प्रधानमंत्री ने कहा, “सितंबर का ये महीना कुपोषण से लड़ाई को समर्पित है।” पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों की कई पहलों का जिक्र किया:
- छत्तीसगढ़: “हर घर मुनगा” अभियान, जिसमें पोषण के लिए सहजन (मुनगा) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- गुजरात: मोटे अनाज से बने व्यंजनों की प्रतियोगिता, जिसमें 2 लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया।
- महाराष्ट्र: शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और अभिभावकों का साझा जागरूकता अभियान।
- मिजोरम: निःस्वार्थ सेवा की स्थानीय परंपरा से जुड़ा पोषण वाटिका (न्यूट्रिशन गार्डन) अभियान।
प्रधानमंत्री ने कहा, “मोटे अनाजों को बढ़ावा देने की यह पहल पोषण के साथ-साथ किसानों को भी फायदा पहुंचा रही है।” रिपोर्ट के मुताबिक पोषण ट्रैकर पर 9 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत हैं।
यह संदेश महाराष्ट्र जैसे राज्यों के लिए खास मायने रखता है, जहां इस साल कमजोर मानसून के कारण बड़े हिस्से में सूखा घोषित हुआ है (महाराष्ट्र सूखे की पूरी खबर)। मोटे अनाज कम पानी में उगते हैं, इसलिए सूखे इलाकों में पोषण और खेती, दोनों के लिए इन्हें अहम माना जाता है।
नशे के खिलाफ युवाओं का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा, “लाखों युवाओं ने नशे के विरुद्ध एक बहुत महत्वपूर्ण संकल्प लिया है।” उन्होंने नशा-मुक्त युवा अभियान में MY Bharat स्वयंसेवकों, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS), स्कूल-कॉलेजों के छात्रों और सामाजिक-आध्यात्मिक संगठनों की भागीदारी की सराहना की। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे गीत, नारे और नुक्कड़ नाटक जैसे रचनात्मक माध्यमों से इस अभियान को आगे बढ़ाएं।
इस एपिसोड का बड़ा संदेश
138वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने दो तरह के विषयों को जोड़ा: एक तरफ सुरक्षा और राष्ट्रीय संकल्प का संदेश, और दूसरी तरफ जनगणना, पोषण और नशा-मुक्ति जैसे विषय, जिनकी सफलता आम लोगों की भागीदारी पर टिकी है। जनगणना का लंबा जिक्र बताता है कि सरकार डिजिटल सेल्फ-एन्यूमरेशन को बड़े पैमाने पर सफल बनाना चाहती है। इसमें लोगों का भरोसा और डेटा की सुरक्षा, दोनों अहम होंगे।
स्रोत / संदर्भ
- IANS: ‘मन की बात’ में पीएम मोदी बोले, अब जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी
- Telangana Today (IANS): ‘Collective national duty’, PM Modi urges citizens to participate in census
- प्रभासाक्षी: मन की बात के 138वें एपिसोड के मुद्दे
- पंजाब केसरी: ‘मन की बात’ में पोषण माह
- पंजाब केसरी: नशे के खिलाफ युवाओं का संकल्प
- ETV भारत: मन की बात में सर्जिकल स्ट्राइक, स्वच्छता, पर्यावरण





