7 अक्टूबर: नरेंद्र मोदी ने बुधवार को किसी निर्वाचित सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे किए। उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, मई 2014 तक उस पद पर रहे और 26 मई 2014 से देश के प्रधानमंत्री हैं। इस मौके पर नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में “सेवा ज्योति” कार्यक्रम हुआ, जहां वार्ता24 के अनुसार उन्होंने कहा, “आज मैंने सरकार के प्रमुख के तौर पर लगातार 25 साल की सेवा पूरी कर ली है।” केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक दिन पहले बधाई प्रस्ताव पारित किया था। यह रिपोर्ट इन 25 सालों की तारीखें, चुनाव नतीजे, बड़े फैसले, विवाद और आगे की चुनौतियां एक जगह रखती है।
मुख्य बातें
- गुजरात में करीब 12 साल 7 महीने मुख्यमंत्री, उसके बाद 12 साल 4 महीने से प्रधानमंत्री।
- आकाशवाणी समाचार के अनुसार 22 मार्च 2026 को वे 8,931 दिन पूरे करके देश में सबसे लंबे समय तक किसी निर्वाचित सरकार के प्रमुख रहने वाले नेता बने। यह रिकॉर्ड पहले सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के नाम था।
- उनके नेतृत्व में भाजपा ने गुजरात में तीन विधानसभा चुनाव (2002, 2007, 2012) और देश में तीन लोकसभा चुनाव (2014, 2019, 2024) जीते।
- 2002 के गुजरात दंगे उनके कार्यकाल का सबसे बड़ा विवाद रहे। सुप्रीम कोर्ट की बनाई विशेष जांच टीम ने 2012 में उनके खिलाफ सबूत न होने की रिपोर्ट दी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में बरकरार रखा।
- यह पड़ाव ऐसे समय आया है जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सड़क पर है और रिज़र्व बैंक ने उसी दिन ब्याज दर बढ़ाई है।
आज क्या हुआ
आज तक के अनुसार प्रधानमंत्री ने दिल्ली के सरोजिनी नगर में श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना की। इंदिरा गांधी स्टेडियम में भाजपा का मुख्य “सेवा ज्योति” कार्यक्रम हुआ। वार्ता24 की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने वहां कहा कि 2001 में शपथ लेते समय उन्होंने सोचा भी नहीं था कि यह मुकाम भी आएगा। उन्होंने याद किया कि मुख्यमंत्री बनने पर उनकी मां ने उनसे दो बातें कही थीं: हमेशा गरीबों के लिए काम करना और कभी रिश्वत न लेना।
द ट्रिब्यून के अनुसार उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर लोगों से कहा कि हम यह करके रहेंगे, खुद को अब भी एक विद्यार्थी बताया और कहा कि कोई भी भटकाव देश को इन लक्ष्यों से नहीं रोक पाएगा। अखबार ने लिखा कि यह कार्यक्रम ऐसे समय हुआ जब विपक्ष SIR में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ अभियान चला रहा है। ओपन पत्रिका के अनुसार मंच पर चंद्रबाबू नायडू, एकनाथ शिंदे, पवन कल्याण, नारा लोकेश और चिराग पासवान जैसे NDA नेता मौजूद थे। (द ट्रिब्यून और ओपन ने बयान अंग्रेज़ी में छापे हैं; यहां उनका भावार्थ है।)
मंत्रिमंडल का प्रस्ताव
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार, 6 अक्टूबर को एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री को बधाई दी, डेक्कन हेराल्ड और एशियानेट न्यूज़ ने लिखा। प्रस्ताव में उनके नेतृत्व को “नेशन फर्स्ट” और “सिटीजन फर्स्ट” के सिद्धांतों से जोड़ा गया है। इसमें सरकार की ओर से जो आंकड़े गिनाए गए हैं, वे इस तरह हैं:
| विषय | प्रस्ताव में दिया गया आंकड़ा |
|---|---|
| जन धन खाते | 60 करोड़ |
| पीएम-किसान के तहत किसानों को भेजी गई रकम | ₹4 लाख करोड़ से ज़्यादा |
| गरीबों के लिए बने मकान | 4 करोड़ से ज़्यादा |
| सरकारी पूंजीगत खर्च | ₹2 लाख करोड़ से बढ़कर ₹12 लाख करोड़ से ज़्यादा |
| इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन | ₹2 लाख करोड़ से बढ़कर ₹13 लाख करोड़ से ज़्यादा |
| राष्ट्रीय सुरक्षा में गिनाए गए कदम | 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक, 2025 का ऑपरेशन सिंदूर, अनुच्छेद 370 हटाना |
बधाइयां
इंडिया टीवी के अनुसार उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बधाई दी। ANI के मुताबिक नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद टीनूबू, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर, डोमिनिका के प्रधानमंत्री रूज़वेल्ट स्केरिट और बोत्सवाना के राष्ट्रपति डूमा बोको ने संदेश भेजे। आज तक ने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का संदेश भी छापा है।
भाजपा 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक “सेवा संकल्प अभियान” चला रही है, ओपन पत्रिका ने लिखा। बुधवार को कई राज्यों में मशाल यात्राएं और रैलियां निकलीं।
विपक्ष
जिन रिपोर्टों को हमने पढ़ा, उनमें इस मौके पर विपक्ष के किसी बड़े नेता की सीधी टिप्पणी नहीं थी। कांग्रेस उसी दिन दूसरे मोर्चे पर सरकार पर हमलावर रही: मंगलवार के प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के आकाशवाणी भवन में प्रवेश को लेकर दर्ज प्राथमिकी को पार्टी ने सरकार की हताशा बताया, दिव्य हिमाचल ने लिखा। उस प्रदर्शन का पूरा घटनाक्रम हमारी रिपोर्ट में है: राहुल गांधी को आकाशवाणी भवन से हटाया गया।
25 साल एक नज़र में
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 7 अक्टूबर 2001 | केशुभाई पटेल की जगह गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ |
| फरवरी 2002 | राजकोट-2 सीट से उपचुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने |
| 27 फरवरी 2002 | गोधरा में ट्रेन का डिब्बा जलाया गया, 59 लोगों की मौत; इसके बाद राज्य में दंगे |
| दिसंबर 2002 | विधानसभा चुनाव में भाजपा को 182 में से 127 सीटें |
| 2007 और 2012 | दो और विधानसभा चुनाव जीते: 117 और 115 सीटें |
| सितंबर 2013 | भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया |
| 26 मई 2014 | प्रधानमंत्री पद की पहली शपथ; भाजपा को लोकसभा में 282 सीटें |
| 30 मई 2019 | दूसरी शपथ; भाजपा को 303 सीटें |
| 9 जून 2024 | तीसरी शपथ; भाजपा को 240 सीटें, सहयोगियों के साथ सरकार |
| 22 मार्च 2026 | 8,931 दिन पूरे; देश में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित सरकार के प्रमुख रहने का रिकॉर्ड |
| 7 अक्टूबर 2026 | सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे |
शुरुआत: संगठन से सरकार तक
प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रोफाइल के अनुसार नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के एक छोटे कस्बे में हुआ। उन्होंने पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में काम किया और फिर भाजपा के संगठन में आए। 2001 से पहले उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा था और किसी सरकार में मंत्री भी नहीं रहे थे।
अक्टूबर 2001 में भाजपा ने उन्हें केशुभाई पटेल की जगह मुख्यमंत्री बनाया। राज्य उस समय जनवरी 2001 के कच्छ भूकंप के बाद पुनर्निर्माण से जूझ रहा था। बुधवार को प्रधानमंत्री ने खुद याद किया कि उससे पहले के वर्षों में राज्य ने चक्रवात, सूखा और राजनीतिक अस्थिरता भी देखी थी, वार्ता24 ने लिखा।
गुजरात के साढ़े बारह साल (2001–2014)

2002: दंगे, जांच और अदालतें
मुख्यमंत्री बनने के पांच महीने के भीतर, 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस का एक डिब्बा जलाया गया, जिसमें 59 लोग मारे गए। इसके बाद गुजरात के कई हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे हुए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दंगों में 1,044 लोग मारे गए, जिनमें 790 मुसलमान और 254 हिंदू थे, और 223 लोग लापता बताए गए। कुछ गैर-सरकारी अनुमान इससे ज़्यादा हैं।
राज्य सरकार की भूमिका पर तब से सवाल उठते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में विशेष जांच टीम (SIT) बनाई। SIT ने 2012 में अदालत को रिपोर्ट दी कि मोदी के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक सबूत नहीं हैं। दंगों में मारे गए पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी ज़किया जाफरी ने इस रिपोर्ट को चुनौती दी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने जून 2022 में खारिज कर दिया। 2005 में अमेरिका ने उन्हें वीज़ा देने से इनकार किया था; प्रधानमंत्री बनने के बाद यह रोक हट गई। आलोचक आज भी कहते हैं कि प्रशासन हिंसा रोकने में नाकाम रहा, जबकि मोदी और भाजपा अदालतों के फैसलों का हवाला देते हैं।
तीन चुनाव और “गुजरात मॉडल”
दंगों के बाद विधानसभा भंग हुई और दिसंबर 2002 के चुनाव में भाजपा को 182 में से 127 सीटें मिलीं। 2007 में 117 और 2012 में 115 सीटों के साथ पार्टी फिर जीती। मोदी गुजरात के सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री बने।
इन वर्षों में राज्य सरकार ने निवेश और बुनियादी ढांचे पर ज़ोर दिया। 2003 से “वाइब्रेंट गुजरात” निवेशक सम्मेलन शुरू हुए, गांवों तक लगातार बिजली के लिए ज्योतिग्राम योजना चली, और 2008 में टाटा मोटर्स का नैनो कारखाना पश्चिम बंगाल के सिंगूर से गुजरात के साणंद आया। समर्थकों ने इसे “गुजरात मॉडल” कहा और 2014 के चुनाव प्रचार में यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी बना। आलोचकों का कहना रहा कि राज्य औद्योगिक वृद्धि में आगे रहा, पर कुपोषण और शिक्षा जैसे सामाजिक सूचकों में उतनी तेज़ी नहीं दिखी।
दिल्ली का रास्ता
सितंबर 2013 में भाजपा ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 282 सीटें मिलीं। 1984 के बाद पहली बार किसी एक पार्टी को अपने दम पर बहुमत मिला था। उन्होंने मई 2014 में मुख्यमंत्री पद छोड़ा और आनंदीबेन पटेल उनकी जगह मुख्यमंत्री बनीं।
प्रधानमंत्री के बारह साल (2014–2026)

चुनावी रिकॉर्ड
| चुनाव | भाजपा की सीटें | नतीजा |
|---|---|---|
| गुजरात विधानसभा 2002 | 127 / 182 | सरकार बनी |
| गुजरात विधानसभा 2007 | 117 / 182 | सरकार बनी |
| गुजरात विधानसभा 2012 | 115 / 182 | सरकार बनी |
| लोकसभा 2014 | 282 / 543 | अकेले बहुमत; पहली बार प्रधानमंत्री |
| लोकसभा 2019 | 303 / 543 | अकेले बहुमत; दूसरा कार्यकाल |
| लोकसभा 2024 | 240 / 543 | अकेले बहुमत से 32 कम; NDA सहयोगियों के साथ तीसरा कार्यकाल |
वे 2014 से लोकसभा में वाराणसी का प्रतिनिधित्व करते हैं। आकाशवाणी समाचार के अनुसार वे आज़ादी के बाद जन्मे पहले प्रधानमंत्री हैं और पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने दो पूरे कार्यकाल के बाद तीसरी बार शपथ ली। प्रधानमंत्री के रूप में लगातार कार्यकाल की अवधि में अब उनसे आगे सिर्फ जवाहरलाल नेहरू हैं।
बड़े फैसले और घटनाएं
| कब | क्या | संक्षेप में |
|---|---|---|
| अगस्त 2014 | प्रधानमंत्री जन धन योजना | बैंक खातों का बड़ा अभियान; मंत्रिमंडल के प्रस्ताव के अनुसार अब 60 करोड़ खाते |
| 2 अक्टूबर 2014 | स्वच्छ भारत मिशन | शौचालय निर्माण और सफाई का राष्ट्रीय अभियान |
| 8 नवंबर 2016 | नोटबंदी | ₹500 और ₹1,000 के नोट रातोंरात बंद; सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2023 में फैसले को 4-1 से वैध ठहराया |
| 1 जुलाई 2017 | GST | कई केंद्रीय और राज्य करों की जगह एक कर व्यवस्था |
| 2016 और 2018 | उज्ज्वला और आयुष्मान भारत | गरीब परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन और स्वास्थ्य बीमा |
| फरवरी 2019 | बालाकोट एयर स्ट्राइक | पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान में हवाई कार्रवाई |
| 5 अगस्त 2019 | अनुच्छेद 370 | जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म; सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में फैसला बरकरार रखा |
| दिसंबर 2019 | नागरिकता संशोधन कानून | संसद से पारित; देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए |
| मार्च 2020 | कोविड लॉकडाउन | 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन; बाद में बड़ा टीकाकरण अभियान |
| 2020–2021 | तीन कृषि कानून | किसानों के साल भर के आंदोलन के बाद नवंबर 2021 में वापस लेने की घोषणा |
| अगस्त–सितंबर 2023 | चंद्रयान-3 और G20 | चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग; नई दिल्ली में G20 शिखर सम्मेलन |
| सितंबर 2023 | नारी शक्ति वंदन अधिनियम | संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का कानून |
| 22 जनवरी 2024 | अयोध्या में राम मंदिर | प्राण प्रतिष्ठा समारोह |
| मई 2025 | ऑपरेशन सिंदूर | पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान में सैन्य कार्रवाई |
विवाद और आलोचना
पच्चीस साल का कोई भी कार्यकाल सिर्फ उपलब्धियों की सूची नहीं होता। जिन मुद्दों पर सबसे ज़्यादा बहस हुई, वे ये हैं:
- 2002 के दंगे: SIT को उनके खिलाफ मुकदमा चलाने लायक सबूत नहीं मिले और सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में यह रिपोर्ट बरकरार रखी। उस दौर के प्रशासन पर सवाल उनके आलोचक आज भी उठाते हैं।
- नोटबंदी: सरकार ने इसे काले धन पर चोट बताया। बाद में रिज़र्व बैंक के आंकड़ों से पता चला कि बंद किए गए लगभग सारे नोट बैंकों में लौट आए, और आलोचकों का कहना है कि छोटे कारोबार तथा नकदी पर चलने वाली अर्थव्यवस्था को झटका लगा।
- कृषि कानून: सरकार ने इन्हें सुधार बताया, किसान संगठनों ने खतरा। एक साल के आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री ने खुद इन्हें वापस लेने की घोषणा की।
- कोविड की दूसरी लहर: अप्रैल-मई 2021 में ऑक्सीजन और अस्पताल के बिस्तरों की कमी पर सरकार की कड़ी आलोचना हुई।
- रोज़गार और महंगाई: विपक्ष का सबसे पुराना आरोप यही है कि तेज़ वृद्धि के बावजूद युवाओं के लिए पर्याप्त नौकरियां नहीं बनीं।
- संस्थाएं: विपक्ष जांच एजेंसियों के इस्तेमाल और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है; सरकार इन आरोपों को खारिज करती है। अभी चल रहा SIR विवाद इसी बहस की ताज़ा कड़ी है।
समर्थक और आलोचक क्या कहते हैं
| समर्थकों का पक्ष | आलोचकों का पक्ष | |
|---|---|---|
| अर्थव्यवस्था | बुनियादी ढांचे पर रिकॉर्ड खर्च, डिजिटल भुगतान, GST | रोज़गार की कमी, नोटबंदी का झटका, बढ़ती असमानता |
| कल्याण योजनाएं | बैंक खाते, मकान, गैस, शौचालय सीधे लाभार्थी तक | गिनती बड़ी, पर गुणवत्ता और टिकाऊपन पर सवाल |
| सुरक्षा और विदेश नीति | आतंकवाद पर सख्त जवाब, दुनिया में भारत की बढ़ी हैसियत | पड़ोस में तनाव, चीन सीमा पर गतिरोध |
| लोकतंत्र | लगातार चुनावी जीत ही जनता का फैसला है | संस्थाओं की स्वायत्तता और असहमति की जगह घटी |
आंकड़ों में 25 साल
| पैमाना | आंकड़ा |
|---|---|
| मुख्यमंत्री (गुजरात) | 7 अक्टूबर 2001 से मई 2014: करीब 12 साल 7 महीने |
| प्रधानमंत्री | 26 मई 2014 से अब तक: 12 साल 4 महीने 11 दिन |
| सरकार के प्रमुख के रूप में कुल दिन | करीब 9,130 (आकाशवाणी की 22 मार्च की गिनती 8,931 में उसके बाद के 199 दिन जोड़कर) |
| उनके नेतृत्व में जीते गए चुनाव | 3 विधानसभा (गुजरात) और 3 लोकसभा |
| प्रधानमंत्रियों में स्थान | लगातार कार्यकाल में जवाहरलाल नेहरू के बाद दूसरे |
| उम्र | 76 वर्ष (जन्म 17 सितंबर 1950) |
आगे की चुनौतियां
यह पड़ाव किसी शांत दौर में नहीं आया है। तीन चीज़ें अगले कुछ महीनों में उनकी सरकार की परीक्षा लेंगी।
पहली, चुनाव आयोग का विवाद। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर सड़क पर है और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लंबित हैं। मंगलवार को राहुल गांधी समेत करीब 250 लोगों को हिरासत में लिया गया था।
दूसरी, महंगाई और कर्ज़। रिज़र्व बैंक ने बुधवार को ही रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया और अक्टूबर-दिसंबर में महंगाई 6% तक जाने का अनुमान दिया। ब्योरा हमारी रिपोर्ट में है: RBI ने रेपो रेट 5.50% किया।
तीसरी, पश्चिम एशिया का संकट। तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर है और खाड़ी में भारतीय नाविक हमलों की चपेट में आ रहे हैं। इस हफ्ते ओमान के पास एक टैंकर पर हमले में 11 भारतीय घायल हुए।
इनके अलावा 2027 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, और 2024 से केंद्र में सरकार सहयोगी दलों के समर्थन पर टिकी है।
इसका मतलब क्या है
पच्चीस साल लगातार सत्ता में रहना भारतीय राजनीति में अकेला उदाहरण है, और इस पर कोई विवाद नहीं है। विवाद इस बात पर है कि इस अवधि को कैसे आंका जाए। समर्थक इसे स्थिरता, बुनियादी ढांचे और कल्याण योजनाओं के विस्तार का दौर मानते हैं और लगातार चुनावी जीत को उसका सबूत बताते हैं। आलोचक 2002 से लेकर आज के SIR विवाद तक संस्थाओं और अल्पसंख्यकों से जुड़े सवाल गिनाते हैं।
दोनों बातें एक साथ सच हो सकती हैं, और शायद यही इस पड़ाव की सबसे सटीक तस्वीर है: एक ऐसा नेता जिसे मतदाताओं ने छह बार चुना, और जिसके फैसलों पर बहस भी उतनी ही लंबी चली। प्रधानमंत्री ने खुद अगला लक्ष्य 2047 बताया है। उससे पहले की परीक्षा कहीं ज़्यादा पास है: महंगाई, तेल और चुनाव आयोग पर उठा सवाल।
नोट: जो बयान अंग्रेज़ी रिपोर्टों से लिए गए हैं, वे यहां भावार्थ के रूप में दिए गए हैं। “समर्थक” और “आलोचक” वाले हिस्से दोनों पक्षों के आम तर्कों का सार हैं, किसी एक व्यक्ति का बयान नहीं।
स्रोत / संदर्भ
- आज तक: सत्ता में नरेंद्र मोदी के 25 साल… देशभर में बीजेपी के कार्यक्रम, कैबिनेट ने गिनाईं उपलब्धियां
- वार्ता24: PM मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे, बोले- मां ने कही थी ये दो बातें
- The Tribune: ‘We will do it’: PM Modi’s clarion call as he completes 25 years in public office
- Open: PM Modi Reflects on 25 Years in Public Office
- Deccan Herald: Cabinet adopts resolution marking 25 years in office
- एशियानेट न्यूज़: मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक 25 साल का सफर
- India TV: Political leaders congratulate PM Modi for 25 years in public service
- ANI: PM Modi thanks global leaders for congratulatory wishes
- आकाशवाणी समाचार: PM Modi becomes longest-serving elected head of government in India (22 मार्च 2026)
- प्रधानमंत्री कार्यालय: PM’s Profile
- दिव्य हिमाचल: राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी मोदी-शाह की हताशा का प्रमाण: कांग्रेस
- विकिपीडिया: Narendra Modi
- विकिपीडिया: 2002 Gujarat riots
- विकिपीडिया: 2007 Gujarat Legislative Assembly election





